जेठ पूर्णिमा सोमवार को भगवान जगन्नाथ विश्राम में चले गए। पखवारा भर यानी आषाढ़ कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तक भक्तों को उनके दर्शन नहीं मिलेंगे, हालांकि इस दौरान मंदिरों में होने वाली नियमित पूजा-अर्चना होती रहेगी। भोग में मिठाई, पकवान के बजाए काढ़ा का भोग लगाया जाएगा।
श्री जगन्नाथ जी महोत्सव समिति की ओर से विद्या गौरी वाटिका सत्तीचौरा से विश्राम यात्रा गाजे-बाजे के संग निकाली गई। समिति के अध्यक्ष गोवर्द्धन दास गुप्ता ने विधिविधान से भगवान जगन्नाथ पूजन-अर्चन के साथ आरती की। भगवान जगन्नाथ को बड़े भाई बलभद्र बहन सुभद्रा के साथ रथ पर आरूढ़ कराया। मुख्य अतिथि मंडलायुक्त राजन शुक्ला ने भगवान की आरती उतारी। जय जगन्नाथ के घोष के साथ विश्राम यात्रा आरंभ हुई।
संयोजक बसंत लाल, सह संयोजक राजेश केसरवानी की देखरेख में निकाली गई विश्राम यात्रा में हाथी, घोड़ा, ध्वजा पताका के साथ राधा कृष्ण, कृष्ण बलदेव, सुदामा आदि लीला प्रसंगों पर आधारित झांकियां शामिल थी। भक्ति संगीत की धुन पर नाचते श्रद्धालु चल रहे थे।
विश्राम यात्रा विद्या गौरी वाटिका से आरंभ होकर तिलक मार्ग, मुट्ठीगंज चौराहा, रामभवन, सुलाकी चौराहा, शिवचरण लाल रोड, हिवेट रोड, जीरो रोड स्थित आर्य भवन निकट हाटकेश्वर मंदिर पहुंच कर संपन्न हुई। छह जुलाई रथयात्रा तक भगवान यहीं विश्राम करेंगे। यात्रा में अमर वैश्य मुन्ना भइया, दाऊदयाल गुप्त, जयराम गुप्ता, राजेश केसरवानी, श्रीनाथजी, दुर्गा प्रसाद गुप्ता, कृष्ण भगवान केसरवानी, त्रिलोकी, उज्ज्वल, गगन दास गुप्ता, उमा गुप्ता, निर्मल गुप्ता, मीरा गुप्ता, इंद्राणी मालवीय, उमा सिंह बघेला, लता उपाध्याय, अरुण साहू, अतुल खन्ना आदि शामिल रहे।