इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के डीएम को बृहस्पतिवार को सुबह 10 बजे न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। कहा है कि उपस्थित नहीं होने पर अदालत गंभीर रुख अपनाएगी। कोर्ट ने स्थायी वकील को निर्देश दिया कि इस आदेश के बारे में डीएम को आज ही सूचित करें।
न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की अदालत ने एम/एस एसआरएसडी बिल्डकॉन वेंचर एलएलपी की याचिका पर यह आदेश दिया है। गाजियाबाद की याची कंपनी ने एक संपत्ति नीलामी में 201 करोड़ देकर हासिल की थी। नियम के मुताबिक बिना स्टाम्प ड्यूटी के यह संपत्ति कंपनी के नाम दर्ज हो जानी चाहिए थी। लेकिन, रजिस्ट्रार ऑफिस में 14 करोड़ रुपये स्टाम्प ड्यूटी देने पर ही संपत्ति दर्ज करने की बात कही गई। इस पर कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
डबल बेंच ने दो जुलाई को आदेश दिया कि नीलामी में मिली अचल संपत्तियों को रिकॉर्ड में दर्ज करने के लिए स्टाम्प ड्यूटी नहीं देनी होगी। इस पर रजिस्ट्रार ने कंपनी का नाम रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया। वहीं, डीएम ने 23 सितंबर 2024 को याची कंपनी को एक नोटिस जारी किया है। नोटिस के अनुसार कंपनी पर 14 करोड़ रुपये स्टाम्प ड्यूटी की देयता बनती है, इसे दिया जाए।
नोटिस के खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याची के वकील डॉ.अवनीश त्रिपाठी ने दलील दी कि इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत नीलामी में मिली अचल संपत्तियों को रिकॉर्ड में दर्ज करने के लिए कोई स्टाम्प ड्यूटी नहीं देनी होती है। उन्होंने न्यायालय के डबल बेंच के फैसलों का हवाला दिया। राज्य के वकील दलील का खंडन नहीं कर सके।
कोर्ट ने सवाल किया कि निर्धारित कानून के बावजूद नोटिस क्यों जारी किया गया है। कोर्ट ने गाजियाबाद के डीएम को रिकॉर्ड संग 24 अक्तूबर को सुबह 10 बजे उपस्थित होने का आदेश दिया। ब्यूरो