हिंदी साहित्य सम्मेलन के हिंदी संग्रहालय में शुक्रवार को पचास दशक पुरानी हंस पत्रिका का अध्ययन किया गया। मुंशी प्रेमचंद ने 1930 में बनारस से हंस पत्रिका का संपादन शुरू किया था। जर्मनी की जस्टिना कुरोस्का ने बताया कि हिंदी संग्रहालय में पुरानी पत्रिकाओं और पुस्तकों का दुर्लभ संग्रह है। हिंदी शोधार्थियों के लिए यह संग्रहालय भारत का हीरा है।
दल में शामिल फ्रांसेस्का लूनारी ने कहा कि यहां दुर्लभ पांडुलिपियों का अतुलनीय संग्रह है। दीवारों पर लगी भारतीय साहित्कारों की तस्वीरें कहीं और नहीं मिलती हैं। दल के अन्य सदस्यों में निकलैस फोयडल और रेवारानी डे शामिल रहीं। इस अवसर पर सम्मेलन के प्रबंधक कुंतक मिश्र, राजकुमार शर्मा, पवित्र तिवारी, शेषमणि पांडेय, दुर्गानंद शर्मा, कृष्ण कुमार पांडेय आदि उपस्थित रहे।