उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से बदले पैटर्न पर रविवार को हुई लोअर
सबार्डिनेट मुख्य परीक्षा 2013 परीक्षार्थियों के लिए अच्छी रही। बदलाव के
बाद आयोग ने मुख्य परीक्षा से वैकल्पिक प्रश्नपत्रों को हटाकर उसकी जगह
सामान्य अध्ययन वस्तुनिष्ठ एवं हिंदी-निबंध के लिखित प्रश्नपत्र लागू किए
गए। सामान्य अध्ययन का प्रश्नपत्र जहां परीक्षार्थियों के लिए काफी मनमाफिक
रहा तो हिंदी और निबंध से जुड़े सवाल भी उम्मीद के अनुरूप रहे। सवाल आसान
होने से लोअर सबार्डिनेट परीक्षा की मेरिट अधिक होने की संभावना है।
बदले
पैटर्न पर पहली बार हुई परीक्षा के बारे में परीक्षार्थियों के मन में
काफी असमंजस था, उन्हें डर था कि सामान्य अध्ययन का प्रश्नपत्र किस स्तर का
होगा। परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की माने तो जीएस में कंप्यूटर साइंस
से जुड़े बड़ी संख्या में सवाल पूछे गए, यूपी स्पेशल से भी प्रश्न आए।
प्रतियोगी छात्रों की क्षमता परखने के लिए आयोग ने डिसिजन मेकिंग, रीजनिंग
तथा गणित से जुड़े प्रश्न पूछे। किसी परीक्षार्थी से यह शिकायत नहीं मिली
कि परीक्षा में गणित और रीजनिंग के सवालों से उन्हें परेशानी हुई।
दूसरी
पाली में हुई हिंदी और निबंध की परीक्षा में भी छात्रों को खासी परेशानी
नहीं हुई। हिंदी में परिभाषा से जुड़े प्रश्न पूछने और इस भाग में
आब्जेक्टिव प्रश्न नहीं पूछे जाने से कुछ परीक्षार्थियों को निराशा हुई। आज
के चर्चित विषय गंगा निर्मलीकरण, ग्लोबल वार्मिंग, आतंकवाद, हिंदी की
वर्तमान दशा जैसे विषयों पर निबंध पूछे गए। इन विषयों पर निबंध पूछकर आयोग
ने सभी परीक्षार्थियों को अपनी योग्यता साबित करने का मौका दिया है। आयोग
की परीक्षाओं के विशेषज्ञ रनीश जैन का कहना है कि सामान्य अध्ययन, हिंदी और
निबंध से जुड़े प्रश्न सभी परीक्षार्थियों के लिए अच्छा होने के कारण
मेरिट अधिक जाएगी।
उप्र
लोक सेवा आयोग की ओर से हुई लोअर सबार्डिनेट मुख्य परीक्षा में 1546 पदों
के लिए कुल 27524 परीक्षार्थियों में से 25418 उपस्थित रहे। लखनऊ के 43
परीक्षा केंद्रों पर पंजीकृत 21499 परीक्षार्थियों में से 19755 और
इलाहाबाद के 11 केंद्रों पर पंजीकृत 6025 परीक्षार्थियों में से 5663
परीक्षार्थी उपस्थित रहे। इस प्र्रकार 92 फीसदी से अधिक परीक्षार्थी
उपस्थित रहे।
लोक
सेवा आयोग की नीतियों और अध्यक्ष की कार्यशैली के विरोध में लोवर
सबार्डिनेट परीक्षा के तत्काल बाद आयोग चौराहे पर प्रतियोगी छात्र संघर्ष
समिति के सदस्यों ने प्रतियोगियों के बीच पर्चा बांटा। संघर्ष समिति का
नेतृत्व राणा यशवंत प्रताप सिंह ने किया। उन्होंने आयोग के खिलाफ प्रतियोगी
छात्रों को जागरूक करने के बाद कहा कि परीक्षा के बाद वह संघर्ष के लिए
आगे आएं। विरोध करने वालों में विपिन पटेल, अमित यादव, अभिषेक सिंह, अभिषेक
त्रिपाठी, राघवेंद्र सिंह, विपिन शर्मा सहित बड़ी संख्या में छात्र शामिल
रहे।