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वीडीओ परीक्षा : पकड़ा गया सॉल्वर गिरोह का सरगना, बिहार से लाते थे सॉल्वर

Sun, 23 Dec 2018 08:51 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) भर्ती परीक्षा में सॉल्वर बैठाने वाले गिरोह के सरगना समेत दो लोगों को एसटीएफ ने रविवार को शहर के धूमनगंज इलाके से गिरफ्तार किया। इन्होंने गोरखपुर व लखनऊ में सॉल्वर बैठाए थे, जो एक दिन पहले गिरफ्तार कर लिए गए थे। एसटीएफ का कहना है गिरोह में शामिल स्कूल प्रबंधक समेत दो लोग फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। 
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प्रदेश भर में वीडीओ भर्ती परीक्षा 22 व 23 दिसंबर को आयोजित की गई। पहले दिन हुई परीक्षा में लखनऊ व गोरखपुर में सॉल्वर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। पकड़े गए सॉल्वरों से पूछताछ के बाद पता चला था कि पकड़े गए एक गिरोह का सरगना प्रयागराज निवासी गौतम उर्फ विपिन चंद्र मिश्रा है, जोकि पंचायती राज विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। एक टीम उसकी तलाश में जुटी थी कि तभी रविवार को मुखबिर से उसके धूमनगंज स्थित झलवा तिराहे पर होने की सूचना मिली।

इस पर वहां पहुंचकर इंस्पेक्टर केशव चंद राय ने गौतम व उसके एक साथी शैलेष को गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ के मुताबिक, पूछताछ में गौतम ने बताया कि वह लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर बैठाने वाले गिरोह को संचालित कर रहा है। बताया कि वह और उसका साथी नवाबगंज क्षेत्र के मूल निवासी हैं और किराए पर कमरा लेकर राजरूपपुर में रहते हैं। गिरोह में नवाबगंज बेरावा रोड निवासी संदीप प्रजापति भी शामिल है, जोकि कौशल्या देवी जूनियर हाईस्कूल का प्रबंधक है।
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गिरफ्तार अभियुक्त
1- गौतम मिश्रा उर्फ विपिन चंद्र मिश्रा पुत्र गोकुल प्रसाद मिश्रा निवासी कूढ़ा, थाना नवाबगंज
2- शैलेष कुमार मिश्रा उर्फ दीपू पुत्र लक्ष्मीनारायण निवासी उल्दा महेशगंज अटरामपुर नवाबगंज

वांछित
1- संदीप प्रजापति निवासी बेरावा रोड नवाबगंज
2- राजीव रंजन निवासी पटना, बिहार

बरामदगी
दो आधार कार्ड, पांच फर्जी आधार, एक वोटर आईडी, दो पैन, तीन मोबाइल, दो एटीएम कार्ड, 2010 रुपये, एक डीएल व एक पंचायती राज विभाग का परिचय पत्र, 22 व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट

बयान
सरगना समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसी गिरोह ने गोरखपुर व लखनऊ में सॉल्वर बैठाए थे। फरार चल रहे दो सदस्यों की तलाश की जा रही है। 
नवेंदु सिंह, सीओ एसटीएफ 
 
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बिहार से लाते थे सॉल्वर
एसटीएफ अफसरों ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया है कि गिरोह के सदस्य सबसे पहले अपने आसपास के लोगों व संपर्क के माध्यम से अभ्यर्थियों को तलाशते थे। इसके बाद पटना जाकर वहां रहने वाले राजीव रंजन व नवीन उर्फ नागमणि पांडेय से संपर्क करते थे, जो उन्हें एक लाख रुपये में सॉल्वर उपलब्ध कराते थे। इनमें से नवीन एक दिन पहले ही लखनऊ में गिरफ्तार किया जा चुका है। बिहार में ही फर्जी आईडी कार्ड, आधार व अन्य कागजात भी तैयार होते थे। 

50-60 हजार देते थे सॉल्वर को
एसटीएफ की पूछताछ में सरगना गौतम ने बताया कि राजीव रंजन व नवीन सॉल्वरों को 50 से 60 हजार रुपये उलब्ध कराते थे और बाकी रकम खुद रख लेते थे। जबकि वह खुद अभ्यर्थियों से सॉल्वर बैठाने के नाम पर छह से आठ लाख रुपये वसूलता था। एक लाख रुपये सॉल्वर उपलब्ध कराने वालों को देकर वह शेष रुपये आपस में बांट लेते थे। 

राजीव रंजन का पहले भी आ चुका है नाम
एसटीएफ का कहना है कि राजीव रंजन का नाम पहले भी सॉल्वर उपलब्ध कराने में सामने आ चुका है। पिछले दिनों रेलवे की ग्रुप डी परीक्षा के दौरान धूमनगंज इलाके से एक सॉल्वर पकड़ा गया था, जिसने उसका नाम बताया था। इससे पहले भी कई परीक्षाओं में उसका नाम आ चुका है।
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