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लोकनृत्यों की अद्भुत छटा ने मोहा मन

Wed, 25 Jan 2017 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
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 माघ मेले में त्रिवेणी मार्ग स्थित पंडाल में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र का सांस्कृतिक महोत्सव ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ का आगाज मंगलवार को शानदार अंदाज में हुआ। विभिन्न प्रांतों के लोकनृत्यों की संगम की रेती पर अद्भुत छटा बिखरी। मंत्रोच्चारण के बाद सुकलेश्वर बोरो के दल ने बिहू नृत्य, लालता राम मराबी ने गुदुंब बाजा और सृष्टिधर महतो ने छऊ नृत्य की प्रस्तुति से समां बांध दिया। गजल गायक जगजीत सिंह ने गजलों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘कौन आएगा यहां कोई न आया होगा,मेरा दरवाजा हवाओं ने हिलाया होगा’, ‘अपनी आंखों के समंदर में उतर जाने दे, तेरा मुजरिम हूं मुझे डूब कर मर जाने दे’ गजलें गाकर खूब तालियां लूटी।
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इससे पूर्व मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले ने दीप जलाकर महोत्सव की शुरुआत की। कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय स्तरीय सांस्कृतिक महोत्सव जहां एक तरफ नवीन प्रतिभा को विकसित करने और संस्कृति को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ले जाने में सहायक होते हैं, वहीं लोगों को अपनी संस्कृति से परिचित होने का मौका भी मिलता है। सांस्कृतिक केंद्र निदेशक गौरव कृष्ण बंसल ने महोत्सव की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन संजय पुरुषार्थी ने किया।

भजनों की प्रस्तुतियों ने किया भाव विभोर
 माघ मेला प्रशासन द्वारा संगम नोज पर चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘संगम तीरे’ के अंतर्गत मंगलवार को नीलम शर्मा तथा जयदीप चटर्जी ने लोकगीत और भजन प्रस्तुत किए। ‘मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है करते है, तुम कन्हिया मेरा नाम हो रहा है’ ‘हरे राम हरे कृष्णा’ ‘कौन कहता है भगवान नाचते नहीं गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं’ तथा ‘तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो क्या गम है जिसको छिपा रहे हो’ को प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। लोकगीतों को सुनने के लिए संगम नोज पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही।
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