फाफामऊ में स्थित एमपीवीएम. गंगा गुरुकुलम विद्यालय में हार्टफुलनेस संस्था की ओर से दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। शिक्षकों की बेहतरी के लिए विद्यालय की सचिव डॉ. कृष्णा गुप्ता की देखरेख में इस कार्यशाला का आयोजन किया गया। हार्टफुलनेस ट्रस्ट हैदराबाद में स्थित है। जिसका नाम कान्हा शांति वनम् है। हार्टफुलनेस, शिक्षकों के लिए एक उपकरण है जो उन्हें तनाव को प्रतिबंधित करने, भावनात्मक बुद्धिमत्ता विकसित करने और कक्षा व छात्रों से बेहतर ढंग से जुड़ने मे मदद करता है। यह शिक्षकों को छात्रों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से संवाद करने और एक सकरात्मक वातावरण बनाने में भी मदद करता है।
कार्यक्रम का प्रारंभ पुष्पांजली से हुआ। विद्यालय की शिक्षिका वंदना गुप्ता ने विवेकानंद सभागार में उपस्थित अतिथियों व शिक्षकों का स्वागत किया तथा कहा कि निश्चित रूप से यह कार्यशाला हम सभी के लिए लाभप्रद सिद्ध होगी। कार्यशाला की रिसोर्स पर्सन ज्योति मिश्रा थीं जो कि एक हार्टफुलनेस कोच हैं और विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ी हुई हैं। इस कार्यशाला में विद्यालय की प्रधानाचार्या माधुरी श्रीवास्तव व सभी कॉर्डिनेटर उपस्थित रहे।
कार्यशाला में ज्योति मिश्रा ने बताया कि यह कार्यक्रम शिक्षकों के लिए कैसे उपयोगी है, यह कार्य कैसे करता है, तथा इसके क्या लाभ हैं। उन्होंने इस संस्था से जुड़े कई रोचक विडियो भी दिखाए। इसके बाद इस संस्था की सदस्य डॉ. अनुराधा अग्रवाल ने ध्यान एवं योग के विषय में चर्चा की। उन्होंने कहा कि ध्यान, योग और हार्टफुलनेस अभ्यास शिक्षकों को तनाव और भावनाओं को बेहतर ढंग से प्रतिबंधित करने में मदद करते हैं, जिससे वे कक्षा में शांत और केंद्रित रह सकते हैं।
अगली वक्ता कृष्णा सचदेवा ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ना अत्यंत जरूरी है। यह कार्यक्रम शिक्षकों को छात्रों के साथ बेहतर ढंग से जुड़ने, एक सकरात्मक कक्षा वातावरण बनाने और एक अधिक प्रभावी शिक्षक बनने में मदद करता है। कार्यक्रम की अन्य वक्ता सिस्टर राधा सक्सेना ने बताया की हार्टफुलनेस कार्यक्रम द्वारा शिक्षकों में आत्म जागरूकता, आत्म नियमन, सहानभूति और प्रेरणा जैसी भावनात्मक बुद्धिमत्ता विकसित करता है। राधा सक्सेना ने विभिन्न प्रोप के माध्यम से मनुष्य मन को समझाने का प्रयास किया। कार्यशाला में कई एक्टिविटी भी करवाई गई जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
दूसरे दिन की कार्यशाला में कृष्णा सचदेवा और सिस्टर लता ने शिक्षकों को ध्यान लगाना व मन को शुद्ध करने की प्रक्रिया बताई। सद्भावना ध्यान एक अभ्यास है जिसमे शिक्षक अपने हृदय क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हैं और अपने लिए और दूसरों के लिए सद्भावना विकसित करते हैं। अगले विषय में रिसोर्स पर्सन ज्योति मिश्रा ने बताया कि सभी बच्चों में बौद्धिक क्षमता, समझ, सीखने का कौशल अलग - अलग होता है। शिक्षक के लिए आवश्यक है कि वह विभिन्न तकनीक के माध्यम से विषमरूपी छात्रों के विकास में सहयोग प्रदान करे। कार्यशाला के समापन पर सभी शिक्षकों को प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्याने अतिथियों को ससम्मान उपहार प्रदान किया। उन्होंने सभी को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि, इस कार्यशाला में सभी शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ये कार्यशाला सभी के लिए अत्यंत कारगर साबित हुई। हम भविष्य में भी ऐसे आयोजन करते रहेंगे। उन्होंने कार्यशाला की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की।