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तस्वीरें: गंगा आरती की कैसे होती है तैयारी, नहीं जानते होंगे ये बातें

Thu, 17 Jan 2019 06:29 PM IST
shubham न्यूज डेस्क, अमर उजाला प्रयागराज
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गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के तट पर महापर्व कुंभ का आगाज हो चुका है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं का त्रिवेणी संगम पर डुबकी लगाने का सिलसिला जारी है। मेले के दौरान संगम तट एक छोटे शहर की भांति बस गया है और यहां कई अखाड़े, साधु-संत और समाजसेवी संगठन अपना डेरा डाल चुके हैं। सुबह से शाम तक यहां धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं, लेकिन इन सबसे इतर जिस चीज का हर किसी को इन्तजार रहता है तो वह है यहां शाम को होने वाली गंगा आरती। आरती से पूर्व शंखनाद के साथ मंत्रोच्चारण होता है, शंखों की ध्वनि से गंगाजल व शरीर शुद्ध हो जाते हैं और मंत्रो के जाप से विपत्तियां और बाधाएं नहीं आतीं।
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आधे दर्जन लोग पारम्परिक वेशभूषा में गंगा आरती करते हैं। अधिकतर युवा ही इसमें शामिल होते हैं। गंगा आरती का आयोजन करवाने वाले पुजारी दीपू मिश्र का कहना है कि आरती करने के लिए युवकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
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इसके लिए कोई उम्र सीमा तय नहीं होती, लेकिन आरती करने वाले ऐसे लोग होने चाहिए जो भारी-भरकम आरती के बर्तन का वजन देर तक उठा सकें और आरती से निकलते ताप को सह सकें। कभी-कभी गर्म तेल हाथ पर भी गिरने लगता है उस दौरान भी आरती करते रहने की सहनशक्ति होनी चाहिए यानी कि आरती किसी भी हालत में नहीं रुकनी चाहिए।

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आरती करने वाले युवा केवल आरती ही नहीं करते बल्कि ये अपनी पढ़ाई भी करते रहते हैं। आरती करने के लिए जरूरी नहीं है कि वे ब्रह्मचारी ही हों, विवाहित लोग भी आरती करते हैं। उन्हें इस काम का कोई मेहनताना नहीं मिलता, वे स्वेच्छा से यह कार्य करते हैं।
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अब तक दीपू मिश्र ने लगभग 35 लोगों को प्रशिक्षण दिया है और अभी भी नए युवकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे कहते हैं कि युवाओं को धार्मिक शिक्षा देना उनका मुख्य लक्ष्य है। आरती समिति के अध्यक्ष प्रयागराज के जिलाधिकारी होते हैं फिलहाल सुहास एलवाई इस पद पर हैं।
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