एसटीएफ ने सैकड़ों अपात्र व्यक्तियों के जाली आयुष्मान कार्ड बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। नवाबगंज में गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 84 जाली आयुष्मान कार्ड व अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। आरोपियों ने बताया है कि पटना में बैठे मास्टरमाइंड की मदद से वह यह खेल संचालित कर रहे थे।
एसटीएफ अफसरों के मुताबिक, आरोपियों में अमित पांडेय निवासी नवाबगंज व बृजभुवन पटेल निवासी सोरांव शामिल हैं। मुख्यालय स्थित साइबर टीम को सूचना मिली थी कि प्रयागराज में कुछ लोग जाली दस्तावेजों के माध्यम से अपात्र व्यक्तियों के नाम पर आयुष्मान कार्ड बना रहे हैं। इस पर मंगलवार रात दो लोगों को पकड़ा गया।पूछताछ में अमित ने बताया कि उसने वर्ष 2020-21 में डिजिटल इंडिया आत्मनिर्भर स्कीम से जनसेवा केंद्र का लाइसेंस लिया था। इसी क्रम में उसे आयुष्मान कार्ड बनाने की आईडी प्राप्त हुई। 2022 में उसकी सीएससी आईडी बंद हो गई। इसके बाद वह फर्जी तरीके से लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाता रहा।
2024 में फेसबुक ग्रुप के माध्यम से वह सुनित मंडल निवासी पटना बिहार से जुड़ा। सुनित ने बताया कि वह अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बना सकता है, जिसके एवज में 3500-5000 रुपये लेगा। बकौल अमित उसने अपने मामा के दोस्त संदीप पांडेय, बृजभुवन पटेल आदि के माध्यम से आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के कुछ लोगों से संपर्क किया। कमीशन देने का लालच देकर कहा कि अगर कोई अपात्र व्यक्ति आयुष्मान कार्ड बनवाना चाहता है तो उससे संपर्क कराएं। इसके लिए 12 से 15 हजार रुपये लगेंगे। इसी क्रम में संपर्क में आए प्रदेश के विभिन्न जनपदों के लोगों से यूपीआई के माध्यम से रुपये प्राप्त कर अपात्र लोगों के जाली आयुष्मान कार्ड बनवाने लगा।
एक से दो दिन में तैयार होता था कार्ड
अमित ने एसटीएफ अफसरों के सामने कई और खुलासे किए। बताया कि जिन अपात्र लोगों के जाली आयुष्मान कार्ड बनाने होते थे, उनके आधार कार्ड, फैमिली आईडी व जिले का नाम वह सुनित को व्हाट्सएप से भेजता था। सुनित उनके नाम दूसरे के परिवार में जोड़कर उनका जाली आयुष्मान कार्ड तैयार कर देता था। जिसका आयुष्मान कार्ड बनना होता है, उसके आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी आता था, जिसे वह ही संबंधित व्यक्ति से लेकर सुनित को बताता था। इस प्रक्रिया में दूसरा ओटीपी परिवार के मुखिया के मोबाइल नंबर पर जाता था।
सुनित इसे कैसे प्राप्त करता था, इस बारे में कोई जानकारी होने से उसने इन्कार किया। यह भी बताया कि सुनित एक से दो दिन के भीतर जाली आयुष्मान कार्ड बनाकर उसे भेज देता था। इसके एवज में उसे प्रत्येक कार्ड के हिसाब से 3500-5000 रुपये यूपीआई के माध्यम से दिए जाते थे। अमित ने खुलासा किया कि अब तक सुनित के माध्यम से उसने लगभग 200 जाली आयुष्मान कार्ड बनवाए हैं। दूसरे आरोपी बृजभुवन ने भी यही बातें बताईं। एसटीएफ के मुताबिक, आरोपियों पर नवाबगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराकर उन्हें संबंधित थाने की पुलिस को सौंप दिया गया है।
गिरफ्तार अभियुक्त-
1-अमित पांडेय निवासी सेराना पाण्डेय का पुरवा थाना नवाबगंज।
2-बृजभुवन पटेल निवासी पसियापुर थाना सोरांव।
बरामदगी-
1- 02 मोबाइल फोन।
2- 84 कूटरचित आयुष्मान कार्ड।
3- 112 आयुष्मान कार्ड से संबंधित डाटा।
4- 284 वर्क आयुष्मान कार्ड से संबंधित व्हाट्सएप चैट स्क्रीनशॉट।
5- 01 एटीएम कार्ड।
6- 01 पैन कार्ड।
7- 01 आधार कार्ड।
8- 01 आईडी कार्ड प्राची हाॅस्पिटल प्रयागराज।
9- 690 रुपये नकद।