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गांधी की घड़ी और चरखा इलाहाबाद संग्रहालय में सलामत

Fri, 02 Oct 2020 06:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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बापू से जुड़ीं वस्तुएं। - फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रपिता महात्मा के संघर्षों से लेकर आखिरी सांस तक की स्मृतियों से जुड़ी वस्तुएं संगमनगरी में सुरक्षित हैं। उनकी ऐसी अमर निशानियों कोइलाहाबाद संग्रहालय में संग्रहीत किया गया है। बापू के साथ आखिरी सांस तक रहने वाली उनकी जेब घड़ी भी संग्रहालय में है और सूत कातने वाला चरखा भी।  दांडी मार्च केदौरान लाया गया नमक भी संग्रहालय में सहेज कर रखा गया है। बापू की ये वो प्रिय वस्तुएं हैं, जो संग्रहालय आने वाले हर पर्यटक का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं। गांधी जयंती पर इस बार शुक्रवार को ऑनलाइन प्रदर्शनी में लोग इन वस्तुओं की झलक पा सकते हैं।

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prayagraj news - फोटो : prayagraj
महात्मा गांधी की प्रिय वस्तुओं के संग्रह की वजह से इलाहाबाद संग्रहालय में एक कला दीर्घा बापू के नाम पर बनाई गई है। इसमें उनकी निशानियों के साथ ही आधा दर्जन पत्र भी संग्रहीत हैं, जो उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन केदौरान अलग-अलग लोगों के नाम से लिखे हैं। प्रस्तावित आजाद गैलरी के ठीक ऊपर स्थित गांधी गैलरी में बापू के साथ आखिरी सांस तक रहने वाली घड़ी और उनके संघर्षों का साथी चरखा हर पर्यटक और जिज्ञासु का ध्यान खींचता है।
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
संग्रहालय के उप संग्रहपाल डॉ ओए वानखेड़े बताते हैं कि यहां आने वाले पर्यटक गांधी गैलरी घूमना नहीं भूलते। खास तौर से घड़ी और चरखा की वजह से यह दीर्घा पर्यटकों को लुभाती रही है। इस संग्रहालय की शोभा बनी गांधी की ये वस्तुएं वर्ष 1954 में लाई गईं। बताते हैं देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू ने उनके चरखे और घड़ी को संग्रहालय प्रशासन को प्रदान किया था। वर्ष 1950 में कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रस्ताव पारित कर गांधी की इन वस्तुओं को संग्रहालय को दान करने का निर्णय लिया गया था।
  • गांधी की जेब घड़ी और चरखा दोनों संग्रहालय में है। उनकी इस वस्तुओं को संग्रहालय को सौंपने के लिए कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद पं जवाहर लाल नेहरू ने घड़ी, चरखा संग्रहालय को सौंपा। डॉ सुनील गुप्ता, निदेशक-इलाहाबाद संग्रहालय।


गांधी स्मृति वाहन भी यादगार

प्रयागराज। इलाहाबाद संग्रहालय में गांधी स्मृति वाहन को भी सहेज कर रखा गया है। यह वो स्मृति वाहन है, जिस पर बापू की अस्थियां रखकर संगम में विसर्जित की गई थीं। इस वाहन को उनकी पुण्य तिथि पर 13 फरवरी को फूलमाला से सजाकर पर्यटकों के दर्शन के लिए रखा जाता है।
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