महात्मा गांधी की प्रिय वस्तुओं के संग्रह की वजह से इलाहाबाद संग्रहालय में एक कला दीर्घा बापू के नाम पर बनाई गई है। इसमें उनकी निशानियों के साथ ही आधा दर्जन पत्र भी संग्रहीत हैं, जो उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन केदौरान अलग-अलग लोगों के नाम से लिखे हैं। प्रस्तावित आजाद गैलरी के ठीक ऊपर स्थित गांधी गैलरी में बापू के साथ आखिरी सांस तक रहने वाली घड़ी और उनके संघर्षों का साथी चरखा हर पर्यटक और जिज्ञासु का ध्यान खींचता है।
संग्रहालय के उप संग्रहपाल डॉ ओए वानखेड़े बताते हैं कि यहां आने वाले पर्यटक गांधी गैलरी घूमना नहीं भूलते। खास तौर से घड़ी और चरखा की वजह से यह दीर्घा पर्यटकों को लुभाती रही है। इस संग्रहालय की शोभा बनी गांधी की ये वस्तुएं वर्ष 1954 में लाई गईं। बताते हैं देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू ने उनके चरखे और घड़ी को संग्रहालय प्रशासन को प्रदान किया था। वर्ष 1950 में कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रस्ताव पारित कर गांधी की इन वस्तुओं को संग्रहालय को दान करने का निर्णय लिया गया था।
- गांधी की जेब घड़ी और चरखा दोनों संग्रहालय में है। उनकी इस वस्तुओं को संग्रहालय को सौंपने के लिए कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद पं जवाहर लाल नेहरू ने घड़ी, चरखा संग्रहालय को सौंपा। डॉ सुनील गुप्ता, निदेशक-इलाहाबाद संग्रहालय।
गांधी स्मृति वाहन भी यादगार
प्रयागराज। इलाहाबाद संग्रहालय में गांधी स्मृति वाहन को भी सहेज कर रखा गया है। यह वो स्मृति वाहन है, जिस पर बापू की अस्थियां रखकर संगम में विसर्जित की गई थीं। इस वाहन को उनकी पुण्य तिथि पर 13 फरवरी को फूलमाला से सजाकर पर्यटकों के दर्शन के लिए रखा जाता है।