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गांवों के विकास के लिए गांधी के विचार आज भी प्रासंगिकः प्रोफेसर हर्षे

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झूंसी के खबरों से जुड़ी फोटो - फोटो : JHUSI
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फोटो कैप्शन
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13 जेयूएस 02 गांधी दर्शन पर अपने विचार व्यक्त करते प्रोफेसर राजेन हर्षें एवं पंत संस्थान के निदेशक प्रोफेसर बद्रीनारायण
गांवों के विकास को गांधी के विचार आज भी है प्रासंगिक: प्रोफेसर राजेन हर्षे
पंत संस्थान में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर हर्षे ने रखे विचार
झूंसी। बोर्ड ऑफ गवर्नर के अध्यक्ष तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेन हर्षे ने कहा है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा गांव के विकास को तैयार किया गया खाका आज भी प्रासंगिक है। प्रोफेसर हर्षे ने यह बातें शनिवार को गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान में गांधी दर्शन पर आयोजित व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता कहीं।
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गांधी: जितना मैं समझ पाया विषय पर आयोजित व्याख्यान में प्रोफेसर हर्षे ने गांधी के जीवन शैली, कार्य प्रणाली और राजनीतिक कार्यशैली पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि गांधी जी तत्कालीन भारत के सबसे बड़े मानवतावादी विचारक थे। वह उस डॉक्टर की भांति थे जो रोग की पहचान कर इलाज करता है। ठीक उसी प्रकार गांधी जी समस्याओं का निदान वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया करते थे। गांधी जी जीवन भर सत्य और अहिंसा के मूल्यों को लेकर चले और लोगों को इस पर चलने की प्रेरणा दी। गांधी की सबसे बड़ी उपलब्धि अपने जैसे कई गांधीवादियों को तैयार करना था जो कि समाज की बुराईयों से लड़ सके। गांधी जी समाज और व्यक्ति से जो भी करने को कहते थे। उसे पहले अपने जीवन करके दिखा थे। प्रोफेसर हर्षे ने आगे कहा कि लोग गांधी और आंबेडकर के बीच विभेदों को बहुत प्रमुखता से उठाते हैं और कभी गांधी को तो कभी आंबेडकर को श्रेष्ठ बताते हैं। ये ठीक नहीं है, क्योंकि गांधी जी ऐसा खुद मानते थे कि तत्कालीन भारत में आंबेडकर से बड़ा कोई तार्किक व्यक्ति नहीं था। उनके तर्कों का जवाब देने की क्षमता किसी में नहीं थी। कहा कि गांधी जी ऐसा मानते थे कि पश्चिमी देशों का अंधाधुंध नकल हमारी गुलाम मानसिकता का परिचायक है। कहा कि अक्टूबर में गांधी जी के जन्म का 150 वर्ष पूरा होने जा रहा है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि हम उनके बताए हुए रास्ते पर चलने का प्रयास करें। भारत में रामराज्य स्थापित हो। कहा कि गांधी के सपनों को साकार करके ही हम उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे पाएंगे। पंत संस्थान के निदेशक प्रोफेसर बद्रीनारायण ने प्रोफेसर हर्षे का स्वागत किया और धन्यवाद ज्ञापित किया। कहा कि आज गांधी जी और सावरकर के बीच तुलना की जा रही है। जबकि दोनों अलग-अलग होते हुए सच्चे राष्ट्रभक्त थे। इस मौके पर प्रोफेसर भास्कर मजूमदार, प्रोफेसर एसके पंत, प्रोफेसर सुनीत सिंह, प्रोफेसर जीसी रथ, डॉ. चंद्रईया गोपनी, डॉ. कुणाल केशरी समेत छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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