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अबकी ‘इको फ्रेंडली’ ही रहेंगे गजानन

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Gajanan will remain 'eco friendly' this time
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प्रयागराज। तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण पर नकेल कसने के उद्देश्य से अबकी गणेशोत्सव के तहत जहां गणपति की प्रतिमाएं ‘इको फ्रेंडली’ तैयार की गई है, वहीं पूरे पूजा परिसर को भी पर्यावरण के अनुकूल ही रखा जाएगा। कमेटियों की ओर से प्रतिमाएं छोटी ही तैयार करने का अनुरोध किया गया था।
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अलोपीबाग स्थित तिलक स्मारक भवन में महाराष्ट्र लोकसेवक मंडल के गणेशोत्सव के तहत अबकी सिर्फ मिट्टी से तैयार गणेश पूजे जाएंगे। मंडल के सचिव सतीश पुराणिक कहते हैं, गणपति प्रतिमा भी बीते वर्ष आठ फीट के स्थान पर पांच फीट की ही रखी गई हैं। महत्वपूर्ण यह कि गणपति प्रतिमा के विसर्जन के लिए पहली बार परिसर में ही दस गुणे दस फीट का टैंक बनाया गया है, जिसमें बारिश का पानी एकत्र किया जा रहा है। साथ ही जलकल से भी दो टैंकर मंगाए जाएंगे। इसी टैंक में गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा।
परिसर में वाटर हार्वेस्टिंग का भी प्रबंध किया गया है ताकि बारिश का पानी परिसर में ही जमा रहने के बजाए, जमीन के भीतर चला जाए और पूजा निर्विघ्न हो सके। पूरे कैंपस में एलईडी रोशनी रहेगी। विसर्जन के समय भी खुशियां मनाने को प्राकृतिक गुलाल का ही प्रयोग किया जाएगा।
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वहीं दारागंज स्थित उत्तराधि मठ में भी महाराष्ट्रीय तरुण मंडल की पूजा में गणपति प्रतिमा की ऊंचाई कम रखी गई है। संयोजक राघवेंद्र आचार्य कहते हैं, कमेटियों के अनुरोध पर मूर्तिकार गौतम पाल ने पुआल से ढांचा बनाने के बाद गंगा-यमुना की मिट्टी से ही प्रतिमाएं तैयार कीं। कमेटियों के अनुरोध पर उन्होंने विसर्जन की दृष्टि से प्रतिमाओं को छोटा आकार ही दिया। इसी तरह प्रतिमाओं को सजाने के लिए भी केमिकल के स्थान पर प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग किया गया। विसर्जन में भी हर्बल गुलाल का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
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