प्रशासन के निर्देश पर रात 10 बजे तक पोस्टमार्टम पूरा कर लिया गया और करीब 12 बजे शव गांव पहुंचा। शव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। मां और दादी की हालत बिगड़ने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों व रिश्तेदारों ने रात में ही अंतिम संस्कार का निर्णय लिया। भोर तीन बजे घाट पर एक ही बड़ी चिता तैयार की गई, जिस पर चारों बच्चों के शव रखे गए। पिता कमलेश राव और राजाराम राव ने मुखाग्नि दी। एक ही चिता पर चारों का अंतिम संस्कार होता देख लोगों की आंखें नम हो गईं।
सांसद ने दिया मदद का आश्वासन
सांसद उज्ज्वल रमण सिंह बामपुर गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन दिया। पूर्व विधायक कलेक्टर पांडेय ने भी पीड़ित परिजनों से मुलाकात की। सपा नेता अवधेश यादव, विनय तिवारी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम शंकर पटेल, सपा प्रदेश सचिव विनय कुशवाहा, पूर्व चेयरमैन सिरसा श्याम कृष्ण पप्पू यादव, जिला पंचायत सदस्य देशराज सिंह, विशाल पटेल व बसपा नेता आनंद जैसल भी परिजनों को ढांढ़स बंधाते रहे।
यह था मामला
बामपुर गंगा घाट हादसे में एक ही परिवार के चार बच्चों की मौत से हर किसी की आंख नम हो गई। अनिल और कमलेश सगे भाई हैं। इस दर्दनाक घटना में अनिल के दोनों बेटों की डूबने से मौत हो गई, जिससे उनका पूरा परिवार उजड़ गया। अनिल के बड़े बेटे हिमांशु राव उर्फ कुनाल नहवाई गांव स्थित निजी स्कूल में कक्षा छह का छात्र था, जबकि छोटा बेटा रेयांश राव उर्फ निहाल उसी स्कूल में कक्षा दो में पढ़ता था। दोनों बेटों की मौत की खबर मिलते ही मां किरन रोते-बिलखते गंगा घाट पहुंचीं और शवों को देखते ही बेसुध हो गईं। पिता अनिल गहरे सदमे में खामोश खड़े रहे। अनिल के भाई कमलेश के परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके तीन बच्चों में सबसे बड़े बेटे दिव्यांशु को मछुआरों ने बचा लिया, लेकिन छोटे बेटे ऋषभ राव की डूबने से मौत हो गई।
दो बच्चों के सिर पानी के ऊपर थे, उन्हें खींचकर नाव पर चढ़ाया
बामपुर घाट पर हुए हादसे के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना तीन बच्चों की जान बचाने वाले बादपुर गांव निवासी मछुआरे कलेंद्र निषाद और अजय निषाद को प्रशासन ने सम्मानित किया है। एसीपी मेजा एसपी उपाध्याय ने दोनों को नकद पुरस्कार देकर उनके साहस की सराहना की और उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर औपचारिक सम्मान दिलाने की बात कही।
कलेंद्र निषाद ने बताया कि बच्चों की चीख-पुकार सुनाई दी तो वह अजय निषाद के साथ दौड़ते हुए नदी किनारे पहुंचे और बिना समय गंवाए घाट पर बंधी नाव खोलकर डूबते बच्चों की ओर बढ़ गए। बताया कि दो बच्चों के सिर पानी के ऊपर दिखाई दे रहे थे, जिन्हें तुरंत खींचकर नाव पर चढ़ा लिया गया।
एक अन्य बच्चा पूरी तरह पानी में समा चुका था, जिसे बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी और काफी प्रयास के बाद उसे बाहर निकाल लिया। हालांकि, तेज धारा और गहराई के कारण अन्य चार बच्चों को बचाया नहीं जा सका।