इलाहाबाद हाईकोर्ट के 77 न्यायाधीशोें की फुलकोर्ट मीटिंग ने एक बार फिर कड़ा फैसला लेते हुए चार सिविल जजों (जूनियर डिविजन) को बर्खास्त कर दिया है। बर्खास्तगी की वजह इन जजों के आचरण को लेकर मिल रही गंभीर शिकायतें थी। इन सभी पर जज के रूप में उच्च मानकों का पालन नहीं करने तथा अनुशासनात्मक व्यवहार में कमी की शिकायत पाई गई।
शनिवार को हुई फुलकोर्ट मीटिंग में निचली अदालतों और हाईकोर्ट के न्यायिक अधिकारियों के आचरण और व्यवहार की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट तैयार करने का भी निर्णय लिया गया है। हालांकि हाईकोर्ट प्रशासन ने अभी बर्खास्त किए गए अधिकारियों के नामों का खुलासा नहीं किया है। इससे पूर्व जेटीआरआई में प्रशिक्षण ले रहे 11 न्यायिक अधिकारियों को भी बर्खास्त किया जा चुका है।
फुलकोर्ट मीटिंग में पहली बार उच्च तकनीकी का प्रयोग करते हुए वीडियो कांफ्रेंसिंग से न्यायाधीशों को शामिल किया गया। मीटिंग में हाईकोर्ट प्रधानपीठ और लखनऊ खंडपीठ के दस अधिवक्ताओें को सीनियर एडवोकेट भी नामित किया गया। सीनियर बनाए गए वकीलोें में अजय भनोट, अनिल भूषण, अनुराग खन्ना, एके चतुर्वेदी, बुलबुल गोदियाल, ध्रुव नारायण, आईपी सिंह, एमसी चतुर्वेदी, राजुल भार्गव तथा शशि प्रकाश सिंह के नाम शामिल हैं। इन सभी को न्यायाधीशों ने मतदान के आधार पर चयनित किया है।