इससे पहले कोर्ट ने 14 जनवरी 2026 को आरोपी को अंतरिम जमानत देते हुए शासकीय अधिवक्ता से कहा कि क्या कंपनी और उसके निदेशक के खिलाफ कोई जांच की गई। यदि नहीं, तो उसका कारण और वर्तमान स्थिति बताई जाए।
इस मामले में 29 जनवरी 2026 को विवेचक कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि पूर्व विवेचकों की ओर से कंपनी या उसके निदेशक के खिलाफ कोई जांच नहीं की गई। साथ ही चार्जशीट दाखिल होने तक छह विवेचक बदल चुके थे और बाद में तीन अन्य विवेचक नियुक्त किए गए। इस पर कोर्ट ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही पूछा कि कंपनी के खिलाफ जांच क्यों नहीं हुई और संबंधित विवेचकों के विरुद्ध क्या कार्रवाई प्रस्तावित है।
11 फरवरी 2026 को प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया। हलफनामा में कहा गया कि कोर्ट के आदेश के बाद जांच कराई गई और गंगा नगर के डीसीपी से रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्ट में कई विवेचकों की गंभीर लापरवाही पाई गई। इस मामले से संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध जांच के आदेश दिए गए। साथ ही कंपनी और उसके निदेशक के खिलाफ आगे की जांच के लिए आवश्यक अभिलेख प्राप्त करने हेतु संबंधित न्यायालय में प्रार्थना पत्र दायर किया गया है।
कोर्ट ने मामले को 26 फरवरी 2026 के लिए सूचीबद्ध करते हुए अपर शासकीय अधिवक्ता से कहा कि अगली तिथि पर कंपनी और उसके निदेशक के खिलाफ जांच की प्रगति रिपोर्ट तथा लापरवाह विवेचकों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का परिणाम प्रस्तुत किया जाए।