प्रयागराज जंक्शन पर ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग (एटीवीएम) पर तैनात फैसिलिटेटर (सहायक) असली टिकटों की स्कैनिंग कर उनकी कई प्रतियां तैयार कर (फर्जी टिकट) यात्रियों को बेच रहे थे। चेकिंग के दौरान जब दो यात्रियों के टिकट का नंबर एक ही निकला तो एनसीआर की विजिलेंस टीम की रिपोर्ट पर दो फैसिलिटेटर समेत तीन लोगों के खिलाफ जीआरपी थाने एफआईआर दर्ज की गई।
एनसीआर के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि शुक्रवार 20 मार्च को प्रयागराज- अहमदाबाद सुपरफास्ट ट्रेन यहां से रवाना हुई। अगले दिन इस ट्रेन (गाड़ी नंबर 22968) के यात्री जब अहमदाबाद पहुंचे तो वहां चेकिंग के दौरान दो यात्रियों के पास एक ही नंबर का टिकट मिला। मामले की सूचना अहमदाबाद चेकिंग स्टाफ ने एनसीआर मुख्यालय को भेजी। सूचना मिलते ही एनसीआर की विजिलेंस टीम ने जांच शुरू की। सीनियर डीसीएम हरिमोहन ने बीते तीन महीनों में जारी किए गए सभी टिकटों और फैसिलिटेटर के कामकाज का रिकॉर्ड तलब किया।
सोमवार को जांच में सामने आया कि फैसिलिटेटर विनय शुक्ला ने 20 मार्च को एटीवीएम से अहमदाबाद और सूरत के लिए 11 टिकट बुक कराए थे। इसके बाद जंक्शन पर तैनात दूसरे फैसिलिटेटर गौरव पांडेय ने इन असली टिकटों को चौक इलाके के रहने वाले फहाद से स्कैन कराया। गिरोह ने इन टिकटों की पांच-पांच प्रतियां प्रिंट कीं। शातिरों ने असली टिकटों को काउंटर पर वापस जमा कर उनकी धनराशि निकाल ली और यात्रियों को नकली टिकट थमाकर रकम ऐंठ ली।
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फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर दर्ज एफआईआर
- फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद जंक्शन पर तैनात मुख्य बुकिंग पर्यवेक्षक कौशलेंद्र कुमार मिश्र ने जीआरपी थाने में तहरीर दी। पुलिस ने गौरव पांडेय, विनय शुक्ला और फहाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
फैसिलिटेटर को अनुबंध के आधार पर मिलता है कमीशन
- एटीवीएम पर रेलवे द्वारा फैसिलिटेटर की नियुक्ति की जाती है। अनुबंध के आधार पर फैसिलिटेटर को हर टिकट की बिक्री के आधार पर कमीशन मिलता है।