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प्रयागराज : उमेश पाल के अपहरण में बच निकले थे चार शूटर, राजू पाल के कत्ल में काटेंगे जेल

Sun, 31 Mar 2024 01:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

उमेश पाल का अपहरण कर जान लेवा हमला करने वाले चार शूटर कानूनी दांवपेच का लाभ लेकर कोर्ट से तो बरी हो गए थे, लेकिन राजू पाल हत्याकांड मामले में वह कानून के शिकंजे से नहीं बच सके। अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजाई सुनाई है। यह चारों आरोपी माफिया अतीक के गैंग के सक्रिय सदस्य हैं। 
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उमेश पाल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजू पाल हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए सात में से चार हत्यारे गवाह उमेश पाल के अपहरण के मामले में भी आरोपी थे। तब कानूनी दांवपेच का सहारा लेकर यह सभी बच निकले थे। हालांकि, उनकी यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं रही और ठीक एक साल बाद ही राजू पाल हत्याकांड में उन्हें दोषी करार देते हुए सजा सुना दी गई।

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इन चार आरोपियों में आबिद प्रधान, फरहान, जावेद व इसरार शामिल हैं। इन चारों को राजू पाल हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। खास बात यह है कि यह चारों राजू के जिगरी दोस्त और उसकी हत्या के चश्मदीद उमेश पाल के अपहरण मामले में भी आरोपी थे। साक्ष्यों के अभाव में इन चारों को अपहरण मामले में कोर्ट ने बरी कर दिया था। यह वही मामला है जिसमें 28 मार्च 2023 को अतीक अहमद, खान शौलत हनीफ व दिनेश पासी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

कानूनी दांवपेच में हो गए थे बरी

जानकारों का कहना है कि तब चारों कानूनी दांवपेच का सहारा लेकर कोर्ट से बरी हो गए थे। दरअसल, आबिद के बारे में उमेश ने एफआईआर में बताया था कि आबिद उसे जान से मारने की धमकी दे रहा है। हालांकि, घटना में उसकी और कोई भूमिका का जिक्र नहीं किया गया।

जिस समय यह घटना हुई थी तब आबिद जेल में था। उमेश ने कोर्ट में बताया था कि आबिद व अशरफ उसे जेल से धमकाते थे। उनके आदमी घर आते थे और धमकी देकर चले जाते थे। तीन से चार बार ऐसा हुआ। घर आकर धमकी देने वाले कौन थे, पुलिस इसका पता नहीं लगा पाई। जेल में आबिद से इस घटना का कोई सह अभियुक्त मिला था, इसका भी कोई साक्ष्य अभियोजन पेश नहीं कर पाया। जेल में आबिद से मौके पर मौजूद रहे किसी अभियुक्त के बीच वार्तालाप हुई हो, इसका भी कोई सबूत पुलिस नहीं ढूंढ़ सकी।
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फरहान, जावेद व इसरार के खिलाफ भी नहीं मिला था सुबूत

राजू पाल हत्याकांड में सजा पाने वाले फरहान, जावेद व इसरार समेत पांच उमेश पाल अपहरणकांड में बरी हुए क्योंकि उनके खिलाफ भी पर्याप्त सबूत नहीं ढूंढ़ा जा सका। दरअसल, प्रथम सूचना रिपोर्ट में यह पांचों नामजद नहीं थे। इनके नाम का उल्लेख वादी की ओर से पुलिस के समक्ष व कोर्ट में दर्ज कराए गए बयान में नहीं था। इन पांचों का नाम घटना के चश्मदीद दिलीप पाल ने लिया था।

इसी आधार पर आरोप पत्र में इनका नाम शामिल किया गया था। बयान में दिलीप ने बताया था कि यह पांचों अभियुक्त घटना के दौरान चैलेंजर गाड़ी में मौजूद थे। पुलिस इस चैलेंजर गाड़ी को ही बरामद नहीं कर सकी। उमेश पाल ने भी अपने किसी बयान में इन आरोपियों का नाम नहीं लिया। यही वजह रही कि यह तीनों भी उमेश पाल अपहरण कांड में बरी हुए। हालांकि, राजू पाल हत्याकांड में यह सभी दोषी करार दिए गए।
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