अधिवक्ता की हत्या का खुलासा, वकील समेत चार को जेल
प्रॉपर्टी डीलिंग में लेनदेन के विवाद में रची गई थी साजिश
पांच लाख, जमीन बिक्री के 25 फीसदी कमीशन की दी थी सुपारी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। फाफामऊ में अधिवक्ता सुशील पटेल हत्याकांड का खुलासा आखिरकार पुलिस ने कर दिया। मामले में गिरफ्तार किए गए हत्यारोपी वकील रमेश चंद निगम समेत चार आरोपी जेल भेज दिए गए। पुलिस का दावा है कि रमेश ने प्रॉपर्टी डीलिंग में लेनदेने के विवाद को लेकर यह हत्या कराई। इसके लिए पांच लाख रुपये व जमीन बिक्री का 25 प्रतिशत कमीशन देने की बात तय हुई थी।
मामले का खुलासा शुक्रवार को पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ। पुलिस अफसरों ने बताया कि 23 जून को सोरांव के लेहरा तिवारीपुर निवासी अधिवक्ता सुशील कुमार पटेल की फाफामऊ में गोहरी क्रॉसिंग के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अज्ञात में मामला दर्ज कर पुलिस छानबीन में जुटी। मृतक के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली गई तो पता चला कि घटना से पहले व बाद शिवकुटी निवासी अधिवक्ता रमेश चंद्र निगम ने सबसे ज्यादा बार उनके नंबर पर कॉल की थी। जांच में यह भी पता चला कि वह मृतक अधिवक्ता के संग प्रॉपर्टी डीलिंग के काम में पार्टनर भी था और दोनों में लेनदेन को लेकर विवाद की भी बात सामने आई। जांच में एक अन्य पार्टनर मो. इरफान अंसारी समेत दो अन्य शिवकुमार व चंद्रशेखर के बारे में भी पता चला। चारोें को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई तो सच्चाई सामने आ गई। चारों ने हत्या की बात कुबूल ली जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनके पास से 7400 नगद, तनी मोबाइल, तमंचा, कारतूस व एक कार भी बरामद हुई।
किसकी क्या थी भूमिका
रमेश चंद्र निगम निवासी शिवकुटी- मुख्य साजिशकर्ता
मो. इरफान अंसारी निवासी शांतिपुरम फाफामऊ- शूटरों का इंतजाम करने वाला
शिवकुमार यादव उर्फ जासूस निवासी शिवकुटी- अधिवक्ता को गोली मारने वाला
चंद्रशेखर उर्फ आजाद निवासी गद्दोपुर, सोरांव- घटना के वक्त बाइक चलाने वाला
45 लाख की जमीन, 85 लाख में होना था सौदा
पुलिस के मुताबिक, आरोपी रमेश ने पूछताछ में बताया कि मृतक सुशील के साथ वह लंबे समय से प्रॉपर्टी डीलिंग के काम में लगा था। जिसमें इरफान व चंद्रशेखर उर्फ आजाद भी साथ थे। हालांकि सुशील अक्सर ज्यादा फायदा लेता था। यह खुन्नस बढ़ती गई क्योंकि कई बार ज्यादा में बेचकर सुशील ने जमीन की कीमत उसे बेहद कम बतलाई। जिसकी जानकारी उसे बाद में हुई। उधर हाल ही में उन्होंने गैस गोदाम नाले के पास स्थित जमीन 45 लाख रुपये में खरीदने का सौदा किया था। जिसे करीब 85 लाख में बेचा जाना था। इसमें सुशील 60 परसेंट की हिस्सेदारी मांग रहा था। बकौल पुलिस, रमेश ने बताया कि उसे लगा कि सुशील को रास्ते से हटाकर वह ज्यादा फायदा ले लेेगा, साथ ही उसके रास्ते का कांटा भी हट जाएगा। ऐसे में उसने इरफान व अन्य के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची।
10 हजार रुपये दिए एडवांस
पुलिस के मुताबिक, रमेश ने हत्या के लिए सबसे पहले अपने पार्टनर इरफान को राजी किया। उसे लालच दिया कि वह सुशील की जगह उसे दे देगा और दोनों आगे से आधे-आधे के हिस्सेदार होंगे। इसके बाद रमेश के कहने पर इरफान ने चंद्रशेखर व शिवकुमार को हत्या के लिए तैयार किया। दोनों से कहा कि हत्या के बाद उन्हें पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। यही नहीं नाले के पास वाली जमीन का सौदा होने पर कुल बिक्री का 25 प्रतिशत रकम उन्हेें देगा। वारदात के लिए दोनों को 10 हजार रुपये बतौर पेशगी दी गई।
ऐसे दिया वारदात को अंजाम
पुलिस के मुताबिक घटना वाले दिन सुबह से शिवकुमार व चंद्रशेखर वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे। दोपहर में काफी देर तक उन्होंने सुशील के घर की रेकी भी की। शाम चार बजे करीब सुशील श्रृंगारपुर स्थित चक्की पर गए तो वह उनके पीछे हो लिए। इस दौरान आरोपी रमेश फोन कर बार-बार सुशील की लोकेशन लेता रहा और इसकी जानकारी शिवकुमार व चंद्रशेखर को देता रहा। शाम को जब सुशील बाइक से घर जाने के लिए निकले, उसी दौरान मौका पाकर शिवकुमार ने गोहरी क्रॉसिंग के पास उन्हें गोली मार दी। इसके बाद बाइक चला रहे चंद्रशेखर के साथ भाग निकला।
आरोपी पहले भी हत्या के मामले में हो चुका है नामजद
पुलिस का कहना है कि जांच पड़ताल में इरफान व चंद्रशेखर का कोई आपराधिक इतिहास नहीं मिला है। हालांकि आरोपी अधिवक्ता रमेश के बारे में पता चला है कि वह पहले भी हत्या के मामले में नामजद हो चुका है। यही नहीं एक अन्य आरेापी शिवकुमार पर भी हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हो चुका है। उस पर गैंगस्टर के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है।