इलाहाबाद। तीन महीने से न्याय की आस में भटक रही सामूहिक दुराचार की शिकार किशोरी को अमर उजाला की खबर से इंसाफ मिलने की आस बंधी है। अमर उजाला में खबर छपी तो अफसरों की फटकार पर सक्रिय झूंसी थाने की पुलिस ने नाबालिग लड़की के अपहरण तथा बंधक बनाकर रेप के मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि झूंसी पुलिस अब भी नामजद मुख्य आरोपियों को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है।
झूंसी इलाके की 17 वर्षीय इस लड़की को फरवरी में अपहरण के बाद रीवा से लेकर घूरपुर और करेली तक 13 लोगों ने बेचा-खरीदा और रेप किया। 10 से बीस हजार रुपये में खरीदकर हवस में अंधे लोग उसकी आबरू से खेलते रहे। इधर झूंसी पुलिस ने रिपोर्ट तक नहीं लिखी तो कार्रवाई कहां से करती। किसी तरह अगस्त में छुटकारा पाकर भागी लड़की ने घर आकर आपबीती सुनाई तो डीआईजी के आदेश पर झूंसी थाने में अपहरण का केस लिखा गया। लड़की ने मजिस्ट्रेट के समक्ष भी बयान दिया कि उसे बंधक बनाकर लगातार रेप किया गया मगर झूंसी पुलिस संवेदनहीन बनी रही। आरोप है कि आरोपियों ने पुलिस को जमीन बेचकर पैसा दिया, जिसकी वजह से उन पर हाथ नहीं डाला जा रहा। चार रोज पहले पीड़ित लड़की के साथ उसकी मां ने पुलिस लाइन में आकर गुहार लगाई। पुलिसवालों के सामने मां-बेटी के गले लगकर रोने की तस्वीर के साथ अमर उजाला ने खबर छापी तो आईजी से लेकर एसएसपी तक ने झूंसी पुलिस को फटकारा। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू की।
अमर उजाला में लगातार खबर छपने पर आखिरकार झूंसी पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए लोगों में करेली के मदारीपुर गांव निवासी दीपक और बक्के तथा करेली इलाके के पिता-पुत्र पंचम और धीरज हैं। ये चार किशोरी को खरीदने-बेचने और बलात्कार में शामिल थे। हालांकि पुलिस ने लड़की के अपहरण करने वाले नामजद आरोपियों को नहीं पकड़ा, जिससे पुलिस की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं। झूंसी थाना प्रभारी भगवती प्रसाद का बयान है कि वे घर छोड़कर भागते हैं जबकि पीड़ित परिवार के मुताबिक, सभी आरोपी पुलिस की शह पर घूम रहे हैं।