आजमगढ़ के रहने वाले थे मूल निवासी
इंदु प्रकाश सिंह मूलत आजमगढ़ जनपद के बहलोलपुर, मेहनाजपुर तरवां के रहने वाले थे। उनके पिता का नाम शंभूनाथ सिंह, बड़े भाई कर्नल ओमप्रकाश सिंह, दूसरे स्थान पर इंदु प्रकाश सिंह उर्फ नेता जी, एक बहन गीता सिंह जो इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पत्राचार संस्थान में कार्यरत थीं। सबसे छोटे भाई सुधीर कुमार सिंह उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अधिवक्ता हैं। इंदुप्रकाश सिंह आजमगढ़ से प्रयागराज में 1980 में अध्ययन करने के लिए आए थे।
राजनीति के खिलाड़ी हेमवती नंदन बहुगुणा के सानिध्य में आकर 1983 में राजनीति का ककहरा सीखना शुरू कर दिया था। सन 1985 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय जो पूरब के ऑक्सफोर्ड के नाम से विख्यात है यहां छात्र संघ में महामंत्री का पहली बार चुनाव लड़े और दूसरे स्थान पर रहे। छात्रों की रहनुमाई और संघर्षों नाम से जनमानस में पहचान बनाने वाले इंदु प्रकाश सिंह 1987 में रिकॉर्ड 2199 मतों से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के महामंत्री चुने गए। उनके करीबी वीरेंद्र सिंह के अनुसार उस दौर में इलाहाबाद विश्वविद्यालय का महामंत्री और अध्यक्ष की हैसियत विधायक और सांसदों से बढ़कर हुआ करती थी।
2200 मतों के रिकॉर्ड अंतर से जीते थे अध्यक्ष का चुनाव
छात्रसंघ के चुनाव में इंदु प्रकाश के संचालन समिति में शामिल वीरेंद्र सिंह के अनुसार इंदु प्रकाश 1995 में लगभग 2200 मतों के रिकॉर्ड अंतर से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अध्यक्ष चुने गए थे। छात्रों का जुलूस हिंदू हॉस्टल से जब चलता था तो एक छोर हिंदू हॉस्टल का आखिरी रहता था तो प्रारंभिक छोर की लंबाई लगभग ढाई किलोमीटर की रहती थी। तत्कालीन समय में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एक नारा छात्रों के बीच में सरेआम हो चुका था कि यूनिवर्सिटी का एक प्रकाश, इंदु प्रकाश, इंदु प्रकाश। छात्रों की रहनुमाई एवं छात्रों की समस्याओं के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन व जिला प्रशासन से दो हाथ करने में कभी भी पीछे नहीं रहते थे।
कैसर से इलाज के लिए शुरू कराई गई थी मुहिम
विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष रहे राणा अजीत प्रताप सिंह ने उनकी मदद के लिए मुहिम शुरू कराया था। यह मुहिम देवदूत वानर सेना के पिछड़ा वर्ग कल्याण के डिप्टी डायरेक्टर अजीत प्रताप सिंह ने भी हाथों-हाथ थाम लिया। कई लाख रुपये लोगों ने इंदुप्रकाश के इलाज के लिए मदद के रूप में दिया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। इंदुप्रकाश सिंह उच्च न्यायालय में स्टैंडिंग काउंसिल के साथ-साथ जनपद न्यायालय में पॉस्कोर्ट के मुकदमे को भी लड़ते थे। उनकी दो बेटियां डॉक्टर गरिमा सिंह और महिमा सिंह और एक पुत्र ऋषभ सिंह हैं। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। पुत्र बीटेक करके सिविल सेवा की तैयारी कर रहा है।