इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के पूर्व छात्र प्रो. आरएन भार्गव ने नैनो मैग्नेटिक वायर बनाने की एक ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित की है, जिसकी मदद से पोर्टेबल एमआरआई मशीन तैयार की गई है। पोर्टेबल एमआरआई मशीन आसानी से मरीज तक पहुंचाई जा सकती है।
प्रयोगशाला में तैयार इस मशीन का अभी परीक्षण किया जा रहा है। प्रो. भार्गव ने नैनो तकनीक से स्ट्रांग मैग्नेट बनाया, जिससे अत्यधिक तीव्रता वाले चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण किया जा सकता है और चुंबकीय क्षेत्र पर आधारित डिवाइसों में इसका उपयोग किया जा सकता है।
प्रो. भार्गव ने बताया कि इस तकनीक से नैनो मैग्नेटिक वायर का निर्माण किया गया है, जिसका पेटेंट हो गया है। नैनो मैग्नेटिक वायर के उपयोग से उन्होंने प्रयोगशाला में पोर्टेबल एमआरआई मशीन बनाई, जो सामान्य एमआरआई मशीन से कई गुना छोटी है।
वहीं, इसकी क्षमता सामान्य मशीन से तीन से छह गुना तक अधिक है। यह मशीन मरीज तक आसानी से पहुंचाई जा सकेगी और मौके पर ही मरीज की रिपोर्ट मिल जाएगी।
प्रो. आरएन भार्गव ने 1959 में इविवि से एमससी की पढ़ाई पूरी की थी और इसके बाद उन्होंने अपना स्टार्टअप शुरू किया। वर्तमान में वह अपनी कंपनी नैनो क्रिस्टल्स मैग्नेटिक इन कॉरपोरेशन टैरीटाउन, न्यूयार्क, यूएसए के चेयरमैन व मुख्य वैज्ञानिक हैं।
इविवि के भौतिक विज्ञान विभाग में बीते 10 वर्षों से नैनो कणों पर शोध हो रहा है। इसी से प्रभावित होकर उन्होंने विभागाध्यक्ष प्रो. केएन उत्तम से संपर्क किया और यहां के शोधार्थियों से मिलने की इच्छा जताई।
प्रो. उत्तम ने बताया कि विभाग में ‘डोपेंट इंड्यूस्ड स्पिन कंट्रोल इन नैनाे क्रिस्टल्स फॉर स्ट्रॉन्ग पर्मानेंट मैगनेट्स एंड अदर मैगनेटिक डिवाइसेज’ विषय पर प्रो. भार्गव का व्याख्यान आयोजित किया गया।
इसमें वैज्ञानिक, उद्यमी और शिक्षक भी शामिल हुए। इस मौके पर प्रो. केके भूटानी, डॉ. जीएस दरबारी, डॉ. एमके सिंह, प्रो. विनोद प्रकाश, प्रो. राम कृपाल, प्रो. राजाराम यादव और भौतिक विभाग के अध्यापक मौजूद रहे।
छोटा व हल्का ट्रांसफॉर्मर भी किया तैयार
प्रो. आरएन भार्गव ने नैनो मैग्नेटिक वायर से बिजली का तार भी बनाया है, जो लाइन लॉस को 30 फीसदी तक कम कर देगा। उन्होंने कोबाल्ट फेराइट, आयरन फेराइट नामक नैनो मैटेरियल का उपयोग कर बिजली का तार बनाया है। इस प्रौद्योगिकी को विकसित करने में इलेक्ट्रॉन के स्पिन (चक्रण) गुण का उपयोग किया गया है, जबकि अभी तक इलेक्ट्रॉन में उपस्थित द्रव्यमान व आवेश का इस्तेमाल किया जाता रहा है। साथ ही उन्होंने नैनो मैग्नेटिक वायर से एक ऐसा ट्रांसफॉर्मर बनाया है, जिसका आकार सामान्य ट्रांसफॉर्मर से कई गुना कम है और उसकी क्षमता तीन गुना अधिक है। बेहतर गुणवत्ता वाले इस ट्रांसफॉर्मर को गर्म होने से बचाया जा सकेगा और आग लगने की दुर्घटनाओं में कमी आएगी।