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प्रयागराज : हाईकोर्ट बार के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष का अज्ञात में हुआ था अंतिम संस्कार

Wed, 19 Jan 2022 01:27 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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हाईकोर्ट बार के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंगला प्रसाद त्रिपाठी। फाइल फोटो। - फोटो : prayagraj
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हाईकोर्ट बार के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंगला प्रसाद तिवारी (60) की सात दिसंबर को ही मौत हो गई थी। शिनाख्त न होने पर पुलिस ने तीन दिनों बाद पोस्टमार्टम कराकर अज्ञात में अंतिम संस्कार कर दिया था। मंगलवार को फोटो के जरिए परिजनों ने उनकी शिनाख्त की। उधर इस बात का पता चलने पर कर्नलगंज थाने पहुंचकर अधिवक्ताओं ने नाराजगी जताई। बाद में पुलिस अफसरों ने किसी तरह समझाकर उन्हें शांत कराया।

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परिजनों ने कर्नलगंज थाने में पांच जनवरी को उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। मूल रूप से जौनपुर के बक्शा थाना क्षेत्र स्थित अगरौरा के रहने वाले मंगला प्रसाद कर्नलगंज के छोटा बघाड़ा में किराये के मकान में रहते थे। पुलिस के मुताबिक, उनके बटे मनोज ने बताया कि वह शहर में रहते थे जबकि परिवार गांव में स्थित पैतृक मकान में रहता है।

तीन जनवरी को वह मिलने गए तो पिता के कमरे में बाहर से ताला बंद मिला। फोन भी बंद था। ताला तोड़कर वह कमरे में गया तो मोबाइल बिस्तर पर बंद पड़ा था। बहुत खोजबीन के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चला। इसके बाद उसने थाने में सूचना दी।
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अचानक गिर पड़े जमीन पर, फिर हो गई मौत
कई दिनों की तलाश के बाद भी पता नहीं चला तो पुलिस ने उनके मोबाइल की कॉल डिटेल रिपोर्ट निकलवाई। इससे जानकारी मिली कि छह जनवरी के बाद से उनके मोबाइल से कोई कॉल नहीं की गई थी।

इसके साथ ही उनके कमरे से मिली दवाओं से यह भी पता चला कि उन्हें हृदय संबंधी बीमारी भी थी। इसके बाद पुलिस ने पिछले एक महीने में मिले अज्ञात शवों की जानकारी जुटाई तो पता चला कि सात दिसंबर को पुलिस ऑफिस के पास स्थित चाय की दुकान पर एक अज्ञात शव मिला था।

दशरथ नाम के उस दुकानदार से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि एक व्यक्ति उसकी दुकान पर बैठा था। अचानक वह जमीन पर गिर पड़ा और फिर कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। काफी कोशिश के बाद भी उसकी शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस ने शव मर्चरी भेज दिया था। पुलिस ने बताया कि यह जानकारी मिलने पर मृतक की तस्वीर परिजनों को भेजी गई तो उन्होंने शिनाख्त कर ली। बेटे मनोज ने बताया कि तस्वीर उनके पिता की है।

अधिवक्ताओं ने जताई नाराजगी
उधर प्रकरण की जानकारी पर अधिवक्ताओं ने थाने पहुंचकर नाराजगी भी जताई। इनमें सुरेश पांडेय, प्रदीप मिश्रा अंशुमान, आशुतोष त्रिपाठी, दिलीप यादव, जीतेंद्र सिंह व अन्य शामिल थे। उनका कहना था कि पुलिस ने गंभीरता दिखाई होती तो पूर्व उपाध्यक्ष की पहचान हो जाती और उनका अंतिम संस्कार अज्ञात में न होता।

सीओ अजीत सिंह चौहान ने बताया कि परिजनों ने पांच जनवरी को गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसके बाद से लगातार उनकी तलाश की जा रही थी। पीएम रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट अटैक आया है। 

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