पूर्व सांसद उमाकांत यादव को हाईकोर्ट ने एक बार फिर राहत दी है। कोर्ट ने स्पेशलकोर्ट एमपीएमएलए के समक्ष सरेंडर करने का सप्ताह भर का मौका दिया है। पुलिस को निर्देश दिया है कि इस दौरान उनका उत्पीड़न नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा है कि याची कोर्ट में समर्पण कर यदि जमानत अर्जी देता है तो स्पेशलकोर्ट अर्जी को नियमानुसार निर्णीत करे। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने उमाकांत यादव की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
स्पेशल कोर्ट प्रयागराज ने मुकदमे की सुनवाई में हाजिर न होने पर उमाकांत के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया है। उमाकांत ने याचिका दाखिल कर वारंट वापस लेने की मांग की थी। मगर हाईकोर्ट ने उनको सरेंडर करने का मौका देते हुए कहा कि वह स्पेशलकोर्ट के समक्ष हाजिर होकर जमानत अर्जी पेश करें। इसके बावजूद वह हाजिर नहीं हुए और हाईकोर्ट से और समय देने की मांग की।
कोर्ट ने उनको सप्ताह भर की मोहलत दी है। उमाकांत के खिलाफ जौनपुर के शाहगंज जीआरपी थाने में हत्या व हत्या के प्रयास व अन्य आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जिस केस की सुनवाई विशेष अदालत कर रही है। हाईकोर्ट ने कई बार याची को समर्पण करने का अवसर दिया, किंतु वह लगातार कोर्ट में आकर राहत की मांग करता रहा है। कोर्ट ने एक हफ्ते में समर्पण करने का अवसर दिया है।
47 अपराधों का ब्योरा पेश करें उमाकांत
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद उमाकांत यादव को 25 फरवरी तक अपने खिलाफ 47आपराधिक मामलों का ब्योरा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजुल भार्गव ने दिया है। याचिका पर प्रतिवाद करते हुए सरकारी अधिवक्ता ने आपत्ति की और कहा कि याची ने 47 मुकदमों में से केवल 32 मुकदमों की जानकारी दी है। शेष 15 मुकदमों के बारे में जानकारी नहीं दी है। जिस पर कोर्ट ने याची अधिवक्ता को हलफनामा दाखिल कर केस हिस्ट्री का पूरा ब्योरा देने का निर्देश दिया है। सुनवाई 25 फरवरी को होगी।