इलाहाबाद हाईकोर्ट से जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह को फिर झटका मिला है। जौनपुर की एमपी एमएलए की विशेष अदालत से मिली सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर राज्य सरकार की ओर से आपत्ति दाखिल न किए जाने से सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने विशेष अदालत से रिकॉर्ड और राज्य सरकार से 22 अप्रैल तक जवाब तलब किया है।
पूर्व सांसद धनंजय सिंह और संतोष विक्रम सिंह की अपील पर न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की एकल पीठ सुनवाई कर रही है। अपील में दोनों याचियों ने नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंघल के अपहरण, रंगदारी मांगने, धमकाने और आपराधिक साजिश में जौनपुर की एमपी एमएलए कोर्ट से मिली सात वर्ष की सजा को निलंबित करने और जमानत दिए जाने की मांग की गई है।
इससे पहले यह मामला 20 मार्च और एक अप्रैल को भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ था, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी थी। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि अब तक राज्य सरकार की ओर से अपील पर आपत्ति दाखिल नहीं की गई है और न ही एमपी एमएलए कोर्ट का रिकॉर्ड आ सका है।
कोर्ट ने एमपी एमएलए कोर्ट से रिकॉर्ड तलब करते हुए मामले की सुनवाई 24 अप्रैल तक टाल दी है। कोर्ट ने कहा है कि इस दौरान 22 अप्रैल तक राज्य सरकार अपनी आपत्ति दाखिल कर सकती है।
सात वर्ष पूर्व लगा था सांसद के राजनीतिक भविष्य पर रोड़ा
इलाहाबाद हाईकोर्ट में लगातार टलती जा रही सुनवाई से पूर्व सांसद धनंजय सिंह के चुनाव लड़ने के फैसले पर रोड़ा लगा हुआ है। दरअसल, जौनपुर की विशेष अदालत ने उन्हें एक मामले में सात वर्ष की सजा सुनाई है। उन्हें जेल भेज दिया गया । सात वर्ष की सजा के निलंबित हुए बिना वह चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।