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UP : पूर्व विधायक विजय मिश्र के बेटे को हाईकोर्ट से मिली जमानत, दुष्कर्म पीड़िता को धमकी दिलाने का मामला

Sun, 21 Dec 2025 06:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Vijay Mishra Mla News : बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्र के बेटे विष्णु मिश्र को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दुष्कर्म पीड़िता को धमकी दिलाने के मामले में बंद विष्णु मिश्र की जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली। यह फैसला जस्टिस राजबीर सिंह की एकल पीठ ने दिया है।
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पूर्व विधायक विजय मिश्र और विष्णु मिश्र। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा जेल में बंद भदोही से सपा के पूर्व बाहुबली विधायक विजय मिश्र के बेटे विष्णु मिश्र को सशर्त जमानत दे दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की एकलपीठ ने दिया है। वाराणसी के जैतपुरा थाने में 13 सितंबर 2021 को एक महिला ने धमकी देने व हत्या का प्रयास सहित कई आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था। महिला ने पूर्व विधायक विजय मिश्र, उनके बेटे विष्णु मिश्र, नाती विकास मिश्रा, बेटी रीमा पांडेय, सीमा पांडेय समेत 12 लोगों को नामजद किया था।

महिला ने विधायक विजय मिश्र व अन्य पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। आरोप लगाया था कि उनके बेटे व अन्य ने उसके घर पर पहुंच कर बयान बदलने के लिए धमकाया। मुकदमे में सुलह करने के किए दबाव डाला गया। इस मामले में जेल में बंद विष्णु मिश्र ने अप्रैल 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में तीसरी जमानत अर्जी दायर की।

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पहली 30 अक्तूबर 2023 और दूसरी जमानत अर्जी तीन मार्च 2025 को खारिज कर दी थी। तीसरी जमानत अर्जी पर याची अधिवक्ता ने दलील दी कि याची निर्दोष है और उसे गलत फंसाया गया है। कथित घटना के लगभग नौ महीने बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। इसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं है। याची 24 जुलाई 2022 से जेल में है। जमानत दी जाती है तो वह उसका दुरुपयोग नहीं करेगा।

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पीड़िता के अधिवक्ता ने सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताई

शिकायतकर्ता महिला की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि आवेदक विष्णु पर विधायक विजय मिश्रा के साथ 2020 में भी भदोही के पुलिस स्टेशन गोपीगंज में सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उसी मामले की शिकायतकर्ता को धमकी दी गई है। जेल से छूटने के बाद आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि शिकायतकर्ता की पहले ही ट्रायल कोर्ट के सामने जांच हो चुकी है। इसलिए ये जमानत का मामला बनता है। कोर्ट ने सशर्त जमानत अर्जी मंजूर कर ली।

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