Former minister Rakeshadhar will be prosecuted for corruption, dismissal
आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी को एक बार फिर झटका लगा है। स्पेशलकोर्ट एमपीएमएलए ने उनको मुकदमे से उन्मोचित (डिस्चार्ज) करने की अर्जी खारिज कर दी है। अब राकेशधर पर आरोप तय होगा और मुकदमे का विचारण किया जाएगा। अर्जी खारिज करते हुए कोर्ट ने पूर्व मंत्री पर लगे भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में आरोप तय करने का निर्णय किया है।
पूर्व मंत्री की ओर से आरोप से उन्मोचित करने की अर्जी देकर कहा गया था कि उसके खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप नहीं बनता है। अर्जी का शिकायतकर्ता अजय कुमार पांडेय ने विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्त द्वारा कुल व्यय उसकी आय की तुलना में 295 प्रतिशत अधिक है। शिकायतकर्ता ने पूर्व मंत्री की डिस्चार्ज अर्जी खारिज करने की मांग की थी।
पूर्व मंत्री पर आरोप तय करने पर 28 अगस्त को सुनवाई होगी। राकेशधर को इस दिन अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अभियुक्त के खिलाफ आरोप तय किए जाने के लिए इस स्तर पर साक्ष्य का विस्तृत मूल्यांकन करने की आवश्यकता नहीं है। आरोप तय किए जाने के लिए पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य ही पर्याप्त होता है। प्रकरण की सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी कोर्ट में उपस्थित थे।
यह आदेश स्पेशल कोर्ट केजज पवन कुमार तिवारी ने एसपीओ हरिओंकार सिंह, राधाकृष्ण मिश्र, एडीजीसी राजेश गुप्ता और बचाव पक्ष की ओर से हाईकोर्ट केे अधिवक्ता दिलीप कुमार को सुनकर दिया है।
उल्लेखनीय है कि पूर्वमंत्री के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान के निरीक्षक राम सुभग ने मुट्ठीगंज थाने में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) ई सपठित धारा 13 (2) के तहत 18 जून 2013 को एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि राकेशधर ने लोक पद (मंत्री) पर रहते हुए अपने आय के समस्त ज्ञात व वैध स्रोतों से कुल 49 लाख 49 हजार 928 रुपए की आय अर्जित की तथा इस अवधि में इनके द्वारा संपत्तियों के अर्जन और भरण पोषण पर किया गया कुल व्यय दो करोड़ 67 लाख आठ हजार 605 रुपए पाया गया।
जांच की निर्धारित अवधि में अर्जित की गई आय के सापेक्ष दो करोड़ 17 लाख 58 हजार 677 रुपए का अधिक व्यय किया गया, जिसे पूर्व मंत्री की आय से अधिक आनुपातिक पाया गया था। विवेचना के बाद 14 मार्च 2016 को आरोप पत्र दाखिल किया गया। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम वाराणसी द्वारा प्रकरण पर संज्ञान लिया गया। 14 नवंबर 2016 को पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी ने स्पेशल कोर्ट में सरेंडर कर जमानत अर्जी पेश की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर उन्हें जेल भेज दिया था। हाईकोर्ट ने 18 जनवरी 2017 को पूर्व मंत्री को सशर्त जमानत दी थी।