इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विदेश यात्रा करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। बिना किसी ठोस विधिक अड़चन के उसे विदेश यात्रा से रोका नहीं जा सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने महराजगंज निवासी वजीर आलम के खिलाफ पारित ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कोर्ट ने आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर विदेश यात्रा करने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया था।
दरअसल, वजीर के खिलाफ वर्ष 2021 में मारपीट और जानलेवा हमले के आरोप में कोतवाली में केस दर्ज हुआ था। इसका ट्रायल लंबित है। इसी दौरान उसने कोर्ट से रोजगार के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगते हुए अर्जी दाखिल की। इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इस पर याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
वकील ने दलील दी कि याची गरीब व्यक्ति है। दो बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी है। नौकरी के लिए विदेश जाना चाहता है। इस दौरान उसके मुकदमे की पैरवी उसके परिवार के सह-आरोपी सदस्य करेंगे। जब इसका हाजिर होना अति आवश्यक होगा तो वह हाजिर हो जाएगा।
कोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने एनओसी अस्वीकार करने के लिए कोई ठोस कारण दर्ज नहीं किया। 25 अगस्त 1993 की केंद्र सरकार की अधिसूचना पर भी विचार नहीं किया। कोर्ट ने यह भी पाया कि याची पहले किसी अपराध में दोषी नहीं ठहराया गया है। लंबित मामले में अधिकतम सजा सात साल से कम है। अपराध जघन्य श्रेणी में नहीं आता है। लिहाजा, कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को 15 दिन के भीतर याची की अर्जी पर नए सिरे से फैसला लेने का आदेश दिया है।