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सदन की एक चौथाई सीटों से ज्यादा सीटों पर पहली बार भगवा

Sat, 02 Dec 2017 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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निकाय चुनाव में भाजपा की बल्ले-बल्ले रही। यह पहला मौका है कि जब नगर निगम सदन की एक चौथाई से ज्यादा सीटों पर भाजपा पार्षद बैठेंगे। नगर निगम में कुल 80 वार्ड है, जबकि निकाय चुनाव में भाजपा के 22 पार्षद चुनाव जीते। इतना ही नहीं मेयर पद पर भी पहली बार भाजपा इस बार कमल खिलाने में कामयाब हो गई। यूं तो यह अभिलाषा का दूसरा कार्यकाल है, लेकिन इस बार वह बीजेपी के सिंबल पर चुनाव जीतीं। नगर निगम के 30 वार्ड ऐसे रहे जहां भाजपा दूसरे स्थान पर रही। कुछ वार्ड ऐसे भी रहे जहां बागियों की वजह से भाजपा को शिकस्त खानी पड़ी। नहीं तो सदन में इस बार सर्वाधिक पार्षद भाजपा के ही रहते।
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इलाहाबाद नगर निगम में मेयर के पद पर भाजपा का खाता इससे पहले कभी भी नहीं खुला था। पिछले चुनाव में भाजपा की कमला सिंह को अभिलाषा गुप्ता ने ही शिकस्त दी थी, जबकि वर्ष 2006 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी विजय मिश्रा को तीसरा स्थान मिला। इस बार विजय मिश्र ने भाजपा छोड़ कांग्रेस ज्वाइन की। फिर भी उन्हें तीसरा स्थान ही मिल सका। यूं तो भाजपा में तीन ऐसे नेता है जो पूर्व में मेयर रह चुके हैं, लेकिन जब वे इलाहाबाद के मेयर बने थे उस समय वे भाजपा में नहीं थे। इन नेताओं में सांसद श्यामा चरण गुप्ता, डा. रीता बहुगुणा जोशी, डा. केपी श्रीवास्तव के नाम शामिल है।

पिछले चुनाव में भाजपा के कुल 11 पार्षद चुनाव जीते थे। बाद में तीन अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों ने भाजपा ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद सदन में भाजपा पार्षदों की संख्या 14 हो गई। इस बार 22 भाजपाई चुनाव जीते। बताया जा रहा कि शपथ ग्रहण समारोह के बाद तकरीबन दर्जन भर निर्दलीय पार्षद भी भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं। भाजपा के लिए इस बार कई वार्ड ऐसे भी रहे जहां उसका प्रदर्शन निराशाजनक रहा। वार्ड दो राजापुर में पार्टी को छठा, वार्ड 23 अलोपीबाग, वार्ड 31 नीमसराय, वार्ड 63 करेलाबाग, वार्ड 64 जीटीबी नगर से पांचवां, वार्ड 71 अटाला में सातवां तो दरियाबाद भाग एक में दसवां स्थान मिला। भाजपा चुनाव के रणनीतिकार एवं पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र देव पांडेय का कहना है कि पार्टी को सभी वर्ग का मत मिला। अगर मत प्रतिशत बढ़ता तो निश्चित ही पार्षद प्रत्याशियों की संख्या 40 से ज्यादा रही होती।
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चुनाव परिणाम आने के बाद तमाम भाजपाई मुंडेरा मंडी में यह कहते दिखे कि एक विशेष रणनीति के तहत इस बार कांग्रेस प्रत्याशी विजय मिश्र को मजबूत उम्मीदवार बताते हुए तमाम वार्डों में प्रचार किया गया। इसका असर यह रहा कि बहुत से भाजपा विरोधियों का झुकाव विजय मिश्र की ओर हो गया। विजय मिश्र पूर्व में भाजपा में ही थे। इस वजह से उन्होंने भी अभिलाषा के खूब वोट काटे। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में सपा प्रत्याशी विनोद के मुकाबले कांग्रेस प्रत्याशी विजय मिश्र को भी खूब वोट मिले। भाजपा नेता आशीष गुप्ता ने बताया कि कांग्रेस नेता को मजबूत बताने का असर यह दिखा कि सपा के भी काफी मत कांग्रेस को मिल गए।
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