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UPPSC : अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए बड़े जिलों में होगी पीसीएस परीक्षा, 41 जनपदों में बनाए गए केंद्र

Thu, 07 Nov 2024 11:48 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

आयोग को 5,76,154 अभ्यर्थियों की प्रारंभिक परीक्षा कराने के लिए 1,758 केंद्रों की आवश्यकता थी और इसके लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर उन केंद्रों की सूची मांगी गई थी, जो 19 जून 2024 को जारी शासनादेश के अनुसार परीक्षा केंद्र के मानक को पूरा कर रहे थे।
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यूपीपीएससी। UPPSC - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2024 सात एवं आठ दिसंबर को प्रदेश के 41 जिलों में होगी। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने बड़े और सुविधाओं के लिहाज से अग्रणी जिलों में ही केंद्र बनाने का निर्णय लिया है। आयोग ने पहले एक ही दिन में परीक्षा कराने के लिए केंद्र निर्धारण पर काम शुरू किया था, हालांकि शासन की ओर से केंद्र निर्धारण की नीति को सख्त करने और निजी स्कूल-कॉलेजों को केंद्र बनाने पर रोक लगाने से आयोग को एक दिन की परीक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में केंद्र नहीं मिल सके।

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आयोग को 5,76,154 अभ्यर्थियों की प्रारंभिक परीक्षा कराने के लिए 1,758 केंद्रों की आवश्यकता थी और इसके लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर उन केंद्रों की सूची मांगी गई थी, जो 19 जून 2024 को जारी शासनादेश के अनुसार परीक्षा केंद्र के मानक को पूरा कर रहे थे।

इस आधार पर आयोग को सभी जिलों में केवल 978 केंद्र ही मिल सके। ऐसे में आयोग को परीक्षा दो दिन कराने का निर्णय लेना पड़ा। आयोग के सूत्रों का कहना है कि दो दिन परीक्षा कराने से अभ्यर्थी अब आधी-आधी संख्या में बंट जाएंगे।

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यानी आयोग को एक दिन में 2,88,077 अभ्यर्थियों की परीक्षा ही करानी होगी। ऐसे में उन जिलों को केंद्र बनाने में तरजीह दी गई है, जो आवागमन के लिहाज से अभ्यर्थियों के लिए सुविधाजनक हों और उन जिलों में सरकारी स्कूल-कॉलेज अधिक संख्या में हों।

इस हिसाब से आयोग ने परीक्षा कराने के लिए 41 जिलों का चयन किया है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिहाज से 41 जिलों में परीक्षा का आयोजन आयोग और प्रशासनिक मशीनरी के लिए भी सुविधाजनक होगा। इस जिलों में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा अब ज्यादा मुस्तैदी से की जा सकेगी। अगर सभी 75 जिलों में परीक्षा होती तो प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के दायरे को बढ़ाना पड़ता। हालांकि, आयोग और प्रशासनिक तंत्र के अफसरों को अब परीक्षा कराने के लिए दो दिनों के हिसाब से व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
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