इलाहाबाद (ब्यूरो)। प्रमुख सचिव से आश्वासन मिलने के बाद विपणन अधिकारी सोमवार से काम पर लौट जाएंगे लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर मंडराता संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। अब तहसीलों में तैनात ऑपरेटरों ने सोमवार से बेमियादी हड़ताल पर जाने का एलान किया है। उनकी शिकायत है कि मानदेय का भुगतान नियमित रूप से नहीं हो रहा है। उनकी हड़ताल से आधार नंबर की फीडिंग, पात्रों का चयन एवं अपात्रों की छंटनी का काम प्रभावित होगा।
विपणन अधिकारियों की हड़ताल के कारण गोदामों से राशन नहीं उठाया जा रहा और न ही कोटेदारों को सरकारी गेहूं-चावल की सप्लाई हो रही है। कंट्रोल की दुकानें खाली हो गई हैं। हालात बिगड़ने पर रविवार को लखनऊ में प्रमुख सचिव ने विपणन अधिकारियों के साथ वार्ता की। यह वार्ता उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले हुई। यूपी फूड एंड सिविल सप्लाईज इंस्पेक्टर्स/ऑफीसर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष दिनेश यादव ने बताया कि विपणन अधिकारियों को कंट्रोल एक्ट 2016 में शामिल करने समेत अन्य मांगों पर विचार के लिए प्रमुख सचिव ने विशेष सचिव बीके त्रिपाठी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है। समिति की रिपोर्ट एक माह में जाएगी। तब तक कंट्रोल एक्ट सस्पेंडेड रहेगा। शासन के इस कदम के बाद विपणन अधिकारियों ने सोमवार से काम पर लौटने का फैसला किया है।
आंदोलन समाप्त नहीं, बल्कि डेढ़ माह के लिए स्थगित किया गया है। अगर मांगें पूरी नहीं होती हैं तो 16 से 19 नवंबर तक जेल भरो आंदोलन होगा और इसमें विपणन विभाग को अन्य विभागों का भी सहयोग मिलेगा। उधर, खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत तहसीलों में तैनात 45 संविदा कंप्यूटर ऑपरेटरों ने सोमवार से बेमियादी हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि प्रति माह साढ़े सात हजार रुपये मानदेय मिलता है। सात माह का भुगतान अटका है। सोमवार को जिला पूर्ति कार्यालय में धरना-प्रदर्शन भी होगा। उनकी हड़ताल से खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन कार्डों में आधार नंबर की फीडिंग का काम रुक जाएगा जबकि सरकार इसे सर्वाधिक महत्व दे रही है। इसके साथ ही अपात्रों की छंटनी और पात्रों क चयन भी प्रभावित होगा।