याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची वर्ष 1995 से प्रभागीय निदेशक (डीएफओ) सामाजिकी वन प्रभाग के अधीन दैनिक वेतन पर कार्यरत था। डीएफओ के आदेश से वर्ष 2020 में विनियमितिकरण के योग्य नहीं पाए जाने पर सेवा से बाहर कर दिए गए। याचियों के डीएफओ के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
दैनिक वेतन भोगियाें की सवेतन सेवा बहाली के आदेश का अनुपालन न करने पर हाईकोर्ट ने रामपुर वन प्रभाग के डीएफओ को कहा है कि एक माह के भीतर आदेश का अनुपालन करें नहीं तो अगली सुनवाई पर कोर्ट में हाजिर हों। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने याची प्रेम चंद्र व अन्य की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर अधिवक्ता अनिल कुमार शुक्ला को सुन कर दिया।
विज्ञापन
याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची वर्ष 1995 से प्रभागीय निदेशक (डीएफओ) सामाजिकी वन प्रभाग के अधीन दैनिक वेतन पर कार्यरत था। डीएफओ के आदेश से वर्ष 2020 में विनियमितिकरण के योग्य नहीं पाए जाने पर सेवा से बाहर कर दिए गए। याचियों के डीएफओ के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
कोर्ट ने विभाग से जवाब तलब कर डीएफओ के आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभा शंकर दुबे के वाद में पारित आदेश के आलोक में अंतरिम राहत प्रदान करते हुए याचियों की सेवाओं को न्यूनतम वेतन के साथ बहाल करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद डीएफओ द्वारा कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया।
विज्ञापन
अवमानना याचिका पर कोर्ट ने डीएफओ को एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करने हुए अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। डीएफओ रामपुर ने आदेश का अनुपालन किए बिना हलफनामा दाखिल कर दिया। हलफनामा से असंतुष्टी जाहिर करते हुए अवमानना अदालत ने उन्हें एक माह का अंतिम अवसर देते हुए कहा कि आदेश का अनुपालन न होने की दशा में डीएफओ रामपुर को अगली नियत तिथि 22 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर रहना होगा।