दिन सोमवार,पर्व पोैष पूर्णिमा, समय सुबह सात बजे। स्थान संगमनोज। फलकामना के लिए गंगा मैया के दर्शन की आतुरता। अचानक फूलों की बारिश। स्नानार्थियों का चकित होना। यह अद्भुत मनोहारी दृश्य संगमघाट का रहा। ऐसा लगा कि संगम दर्शनार्थियों का स्वागत देवी-देवाताओं की तरह किया जा रहा हो। जिसे देखकर श्रद्धालु निहाल हो उठे। इस दौरान स्नान कर रहे लोगोंं ने हर-हर गंगे का चिल्लाकर डुबकी लगाने लगे।