गंगा का जलस्तर बढ़ने से बुधवार की शाम से ही बदरा गांव के करीब 800 घरों की बिजली काट दी गई। बाढ़ प्रभावित कछार का बदरा गांव टापू में तब्दील हो गया है और लोगों में हाहाकार मचा है। बिजली गुल होने से गांव की जलापूर्ति भी प्रभावित हो गई।
बढ़े हुए जलस्तर के कारण नई और पुरानी झूंसी के तटवर्ती इलाकों में बसे मठ, मंदिर, आश्रम और श्मशान घाट भी जद में आ गए हैं। अंतिम संस्कार के लिए जाने वाले लोगों को छतनाग घाट पर एक नाव से जाना पड़ रहा है।
झूंसी के बदरा-सोनौटी से होकर तकरीबन डेढ़ दर्जन कछारी गांव की ओर जोड़ने वाला मुख्य मार्ग लगातार तीसरी बार तीन दिन से बाढ़ की चपेट में है। बाढ़ के कारण मठ और आश्रम में रहने वाले साधु-संतों व बटुकों को दूसरी जगह पर जाना पड़ा है। बुधवार को प्रशासन ने झूंसी के कछारी इलाके में आवागमन के लिए तीन बड़ी और दो छोटी नावें चलवाई थीं।
वहीं, गंगा का जलस्तर बढ़ने से ढोलबजवा, बहादुरपुर, गंजिया, हेतापट्टी, इब्राहिमपुर, खजुरी, मदारपुर, पैगंबरपुर तकरीबन डेढ़ दर्जन से ज्यादा गांव का भी आवागमन प्रभावित हैं। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है। शाम सात बजे तक नाव चलाने के निर्देश दिए गए हैं।