गंगा के बढ़ते जलस्तर पर तटीय इलाकों में अलर्ट
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए गंगा विचार मंच की ओर से रविवार को तटीय इलाकों में जागरूकता अभियान चलाया गया। पूर्व उपमहापौर एवं प्रांत संयोजक अनामिका चौधरी निषाद के नेतृत्व में दारागंज, नागवासुकि और दशाश्वमेध घाट समेत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई।
अनामिका चौधरी ने कहा कि बाढ़ के दौरान जहरीले जीव-जंतुओं के निकलने की आशंका बढ़ जाती है। सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें और तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचकर उपचार कराएं। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आश्रय स्थल बनाए गए हैं, जहां जरूरतमंदों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। बीमारी की स्थिति में तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की भी अपील की। अभियान में पूर्व पार्षद शिवा त्रिपाठी, अन्नू निषाद, नेहा केशरी, विजय केशरी, भीम सिंह, पंकज राय, अमन कुमार, यादव जी और मेजर सुनील निषाद समेत क्षेत्रीय लोगों ने सहयोग किया।
असंपादित... जाम हुई फर्राटेदार गाड़ियां, मैकेनिकों की आई चांदी, तो वाहन स्वामियों के छूटे पसीने
- पानी में वाहन डूबने से गैराजों में मरम्मत के लिए लगी लंबी कतारें
- साइलेंसर से इंजन तक घुसा पानी, वर्कशॉप में भारी भरकम बन रहा बिल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। शहर के निचले इलाकों से लेकर पॉश चौराहों तक, जहां नजर डालिए, वहां बंद पड़ी गाड़ियां और परेशान वाहन मालिकों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें साफ दिख रही हैं। कोई स्कूटी को धक्के मार रहा है, तो कोई कार को छोटी क्रेन से खींचकर सीधे वर्कशॉप पहुंचा रहा है। पिछले दिनों हुए जलभराव ने जहां आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है, वहीं ऑटो मैकेनिकों की तो मानों चांदी कट गई है।
हालत यह है कि शहर के छोटे-छोटे गैराजों से लेकर अधिकृत वर्कशॉप तक में गाड़ियों की लंबी कतारें लग चुकी हैं। स्थिति इतनी विकट है कि स्पार्क प्लग बदलने जैसे छोटे से काम के लिए भी वाहन चालकों को पूरा-पूरा दिन इंतजार करना पड़ रहा है। जार्जटाउन के अमित श्रीवास्तव ने बताया कि जलभराव के चलते उनकी कार आधी डूब गई थी। झूंसी स्थित सर्विस सेंटर तक एक छोटी क्रेन के माध्यम से उसे पहुंचाया गया। जांच में मालूम पड़ा कि पानी साइलेंसर और इंजन तक पहुंच गया। मैकेनिक ने पूरे सिस्टम और इलेक्ट्रिक कंपोनेंट की मरम्मत का 35 हजार रुपये का भारी-भरकम इस्टीमेट थमा दिया।
कुछ ऐसा ही दर्द रामबाग के रितेश मिश्रा का भी है। चंद्रलोक सिनेमा के पास अपनी स्कूटी की मरम्मत करवाने को पहुंचे रितेश ने बताया कि उनकी स्कूटी बारिश के बीच अचानक बंद हुई तो वह उसे धक्का देते-देते थक गए। आदित्य बताते हैं, स्कूटी का प्लग और एयर फिल्टर तो खराब हुआ ही, साथ ही वायरिंग में भी पानी चला गया। वर्कशॉप में भीड़ की वजह से यहां प्राइवेट मैकेनिक से स्कूटी की मरम्मत करवा रहा हूं।
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पानी में गाड़ी बंद हो तो भूलकर भी न करें सेल्फ स्टार्ट की कोशिश
- चंद्रलोक सिनेमा हॉल के पास वाहन सुधारने वाले मोटर मैकेनिक कौशल ने बताया कि इन दिनों उनके पास ऐसे तमाम वाहन आ रहे हैं जिनके साइलेंसर में पानी चला गया है या फिर इंजन तक पानी पहुंच चुका है। कहा कि अधिकांश दोपहिया वाहन इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स से लैस हैं। पानी भर जाने के कारण गाड़ियों के सेंसर, इंजन कंट्रोल यूनिट (ईसीयू) और वायरिंग शॉर्ट हो रही है। यही वजह है कि बाइक और स्कूटी में लगने वाले स्पार्क प्लग की मांग अचानक से कई गुना बढ़ गई है। पानी में गाड़ी बंद हो तो भूलकर भी सेल्फ स्टार्ट की कोशिश न करें। सिविल लाइंस स्थित एक चार पहिया वर्कशॉप के के मोटर मैकेनिक मुन्ना का कहना है कि कई वाहन स्वामियों को गाड़ी के इंजन में पानी जाने के कारण इंजन ओवरहॉलिंग तक करानी पड़ रही है। इसके अलावा बारिश के दौरान विजिबिलिटी कम होने से वाइपर के ब्लेड की मांग में भी जबरदस्त तेजी आई है।
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मौजूदा दौर की गाड़ियां पूरी तरह से टेक्नोलॉजी और सेंसर्स पर आधारित हैं। जलभराव वाले रास्तों से जब वाहन गुजरते हैं, तो पानी सीधे इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स और एयर फिल्टर तक पहुंच जाता है, जिससे इंजन सीज होने या सर्किट फेल होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
- सुशील खरबंदा, अध्यक्ष प्रयागराज ऑटो मोबाइल एसोसिएशन रजिस्टर्ड।
रामबाग के रेलवे ट्रैक से नहीं निकला पानी, 26 तक झूंसी से चलेंगी ट्रेनें
नोट... फोटो है-
प्रयागराज। रामबाग रेलवे स्टेशन पर जलभराव की समस्या से फिलहाल यात्रियों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। भारी बारिश के चलते रेलवे ट्रैक पर लगातार सातवें दिन भी पानी भरा रहा। स्थिति से निपटने के लिए रविवार को रेलवे की ओर से दिनभर पंप लगाकर पानी निकालने का अभियान चलाया गया।
कुछ पानी निकालने के बाद अब रेलवे कर्मचारी सिग्नल सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए युद्धस्तर पर जुट गए हैं। तकनीकी और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए रामबाग से चलने वाली पैसेंजर और मेमू ट्रेनों का संचालन अब 26 अगस्त तक झूंसी रेलवे स्टेशन से ही किया जाएगा।
इससे पहले रेलवे ने इन ट्रेनों को 23 अगस्त तक झूंसी से संचालित करने का निर्णय लिया था। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, ट्रैक से पानी तेजी से जरूर निकल रहा है लेकिन पूरी तरह पानी हटने और सिग्नल व्यवस्था के सामान्य होने के बाद ही रामबाग से ट्रेनों का नियमित संचालन बहाल किया जाएगा। ब्यूरो