उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति में सियासी दांवपेच के कारण प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था भी बेपटरी हो गई है। छह महीने से भी अधिक अवधि बीत चुकी है लेकिन सरकार आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं कर पाई है। इस खींचतान का नतीजा है कि सहायता प्राप्त कालेजों में शिक्षकों के पांच हजार से अधिक पद खाली हैं। 1652 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया जरूर शुरू है लेकिन आगे की प्रक्रिया ठप है। मुश्किल यह कि आयोग में कोरम का अभाव होने की वजह से सबकुछ ठप है। ऐसे में आगामी सत्र शुरू होने से पहले नियुक्ति की संभावना भी खत्म हो गई है।
उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में बदहाली का आलम वर्षों से है। लगातार विवाद की वजह से पूर्व में विज्ञापित दो भर्तियां निरस्त हो चुकी हैं। इसके बाद 2014 में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1652 पदों के लिए शुरू भर्ती प्रक्रिया भी फंसती दिख रही है। वर्षों से कोई भर्ती नहीं होने का नतीजा है कि असिस्टेंट प्रोफेसर के पांच हजार से अधिक पद खाली हो गए हैं। पिछले साल आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के बाद उम्मीद जगी थी कि शिक्षकों की भर्ती जल्द हो जाएगी। शिक्षकों कमी को देखते हुए आयोग के अफसरों ने पिछले साल जुृलाई में असिस्टेंट प्रोफेसर के ढाई हजार पदों पर भर्ती की घोषणा की थी। ये पद 1652 पदों के लिए शुरू भर्ती प्रक्रिया से अलग हैं। इनके अलावा 100 प्राचार्य की भर्ती के लिए भी नोटिफिकेशन होना था लेकिन मानक का पालन नहीं होने की वजह से अध्यक्ष और तीन सदस्यों की नियुक्ति रद्द हो गई। इनकी नियुक्ति रद्द हुए भी छह महीने से अधिक समय निकल चुका है लेकिन नई तैनाती नहीं हो सकी। इसकी वजह से नौकरी की तलाश में युवा तो भटक ही रहे हैं, उच्च शिक्षा व्यवस्था भी ठगमगा गई है। इस हीलाहवाली का फायदा उठाते हुए जालसाजों ने भी युवाओं को निशाना बनाया है। उन्हाेंने फर्जी वेबसाइट बनाकर असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए आवेदन मांगा है।