माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से हर जिले में प्रयोगात्मक परीक्षा कराने वाले विद्यालयों के सापेक्ष रैंडम आधार पर पांच फीसदी विद्यालयों का ऑडिट कराया जाएगा। इसमें किसी प्रतिकूल तथ्य या अनियमितता मिलने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र जारी कर प्रयोगात्मक परीक्षा से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।उन्होंने कहा है कि प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए विद्यालय में प्रयोगशाला, आवश्यक उपकरण एवं सामग्री का अभाव होने पर किसी दूसरे निकटतम संसाधनयुक्त विद्यालय में प्रयोगात्मक परीक्षाएं कराई जाएं और इसकी सूचना समय से संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।
राजकीय विद्यालय में संसाधनों के अभाव के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) स्वयं उत्तरदायी होंगे और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में संसाधनों की कमी होने पर डीआईओएस संबंधित विद्यालय के प्रबंधक व प्रधानाचार्य के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करेंगे।
वित्तविहीन विद्यालयों में यह स्थिति आने पर पर विद्यालय की मान्यता निरस्त कर दी जाएगी। वर्ष 2025 की इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षाएं मंडलवार प्रथम चरण में एक से आठ फरवरी और दूसरे चरण में नौ से 16 फरवरी तक होंगी।
सचिव ने निर्देश दिए हैं कि प्रयोगात्मक परीक्षाएं अनिवार्य रूप से वॉयस रिकाॅर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में ही कराई जाएंगी और इसकी रिकाॅर्डिंग विद्यालयों के प्रधानाचार्य अपने पास सुरक्षित रखेंगे।
परीक्षकों को अपलोड करनी होगी फोटो
वाह्य परीक्षकों को मोबाइल ऐप के उपयोग से जिओ लोकेशनयुक्त फोटो अपलोड करनी होगी और परीक्षा वाले दिन ही पोर्टल पर प्रयोगात्मक परीक्षा के अंक अपलोड करने होंगे। आंतरिक परीक्षकों को भी अपने विद्यालय की लॉगइन आईडी से परिषद की वेबसाइट पर प्रयोगात्मक परीक्षा के अंक उसी दिन अनिवार्य रूप से अपलोड करने होंगे। यूपी बोर्ड ने इस प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रयोगात्मक परीक्षा के पर्यवेक्षण के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किए जाएंगे।
परीक्षक पर दबाव बनाया तो कारावास और जुर्माना
यदि कोई प्रयोगात्मक परीक्षक पर किसी भी प्रकार का अनुचित दबाव बनाता या प्रलोभन देता है तो उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 की धारा-नौ के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें न्यूनतम तीन वर्ष का कारावास (जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है) और तीन लाख रुपये जुर्माने (जिसे 10 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है) का प्रावधान है।