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डकैती में सजा के लिए पांच अभियुक्तों का शामिल होना जरूरीः हाईकोर्ट

Sat, 11 Jul 2020 07:39 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि डकैती के अपराध में सजा देने के लिए यह आवश्यक है कि घटना में कम से कम पांच या उससे अधिक लोगों की संलिप्तता साबित की जाए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो डकैती के अपराध में सजा नहीं दी जा सकती है।
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कोर्ट ने  स्पेशल कोर्ट (डकैती) कानपुर देहात द्वारा तीन अभियुक्तों की डकैती की धाराओं में सुनाई गई सजा रद्द करते हुए उनको बरी करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट का कहना है कि इस मामले में अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि घटना में पांच या उससे अधिक लोग शामिल थे। डकैती के अभियुक्त बलबीर और अन्य की आपराधिक अपील पर न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने यह निर्णय सुनाया। 

मामले के अनुसार कानपुर देहात के थाना काकवान के गांव बजरा मजरा बैकुठिया में 26-17 जून 1981 की रात राजकुमार, ओछेलाल और गंगाराम के घरों में डकैती पड़ी। राजकुमार ने इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके मुताबिक छह की संख्या में डकैत रात में उसके घर में घुस आए। चार लोग घर के भीतर आ गए।
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डकैतों ने फायरिंग भी की। इनमें से तीन को उसने बाद में पहचान परेड में पहचानने का दावा किया। स्पेशलकोर्ट ने चश्मदीद गवाह के बयान के आधार पर बलबीर और लालराम को पांच-पांच वर्ष और मोहलपाल उर्फ चकेरी ने चूंकि फायरिंग भी की थी इसलिए उसे सात वर्ष की सजा सुनाई। बचाव पक्ष का कहना था कि डकैती का अपराध साबित करने के लिए घटना में पांच या उससे अधिक लोगों की संललिप्तता साबित होना जरूरी है।

इस मामले में अधीनस्थ न्यायालय ने यह साबित नहीं किया है कि इन तीन के अलावा दो या तीन लोग और घटना में शामिल थे। ऐसा साबित किए बिना डकैती के अपराध में सजा सुनाना गलत है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए तीन अभियुक्तों को सुनाई गई सजा रद्द कर दी है।
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