कुंभ पर्व में पहली बार पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों की सांस्कृतिक विविधता एक साथ दिखेगी। पूर्वोत्तर के इस सांस्कृतिक संगम में बहुरंगी लोक, रहन-सहन, धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के साथ ही खान-पान का संगम भी होगा।
संगम की रेती पर तकरीबन दो एकड़ में सिक्किम सहित पूर्वोत्तर के सातों राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड के नाम एक पंडाल बनेगा। इसमें देवी कामाख्या और त्रिपुर सुंदरी मंदिरों के प्रतिरूप दिखेंगे। पूर्वोत्तर की विशिष्ट शैली में बनने वाले पंडाल के निर्माण की परिकल्पना के लिए गुवाहाटी से संस्कृतकर्मियों का दो सदस्यीय दल शनिवार को प्रयागराज पहुंचा। निर्माण सामग्री लेकर बड़ा दल दो जनवरी को आएगा।
संस्कार भारती के संस्थापक संरक्षक पद्मश्री बाबा योगेंद्र कहते हैं, इन शिविरों में लघु पूर्वोत्तर भारत सिमट आएगा। इन मंदिरनुमा शिविरों में वहां की दिनचर्या से रूबरू हो सकेंगे, साथ ही शिविर में लगने वाले आठों राज्यों के बडे़ स्टाल पर वहां के रीति-रिवाजों, शिल्प-शैली, परंपराओं, धार्मिक अनुष्ठानों की झलक भी दिखेगी।
स्थानीय संयोजक और संस्कार भारती की अध्यक्ष कल्पना सहाय कहती हैं, सेक्टर सात में तैयार होने वाले पूर्वोत्तर संस्कृति शिविर में बारह जनवरी से 39 दिनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। इसके तहत पूर्वोत्तर के राज्यों सहित पूरे देश से तकरीबन बारह सौ से ज्यादा कलाकार, शिल्पकार, खाद्य पदार्थ बनाने वाले एवं संस्कृतकर्मी आयोजन का हिस्सा बनेंगे।