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आग लगी तो होगा बड़ा हादसा

Sat, 20 Jun 2015 01:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। प्रतापगढ़ के एक होटल में शार्ट सर्किट से लगी आग ने कई जानें ले लीं। होटल में धुआं निकलने का रास्ता न होने के कारण ज्यादातर मौतें दम घुटने से हुईं। इलाहाबाद में कई होटलों की भी स्थिति इसी तरह है, जिनमें अगर आग लग गई तो कई जिंदगियां दफन हो जाएंगी। पटरी पार हीवेट रोड, लीडर रोड, काटजू रोड और जानसेगंज में छोटे-बड़े करीब दो दर्जन होटल हैं। संकरी सड़क, गलियों में चल रहे इन होटलों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इनमें न बालकनी है और न ही वेंटिलेशन। आगे से शीशा लगाकर खिड़कियों क ो बंद कर दिया गया है।
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पटरी पार पुराने शहर में चार-पांच को छोड़कर ज्यादातर होटल काफी पुराने हैं। पुराने के साथ ही जानसेनगंज, हीवेट रोड, काटजू रोड पर नए होटल भी बने हैं। पुराने होटल छह-आठ कमरों के हैं लेकिन पिछले 10-15 वर्षों में बने होटल 20 से लेकर 30-40 कमरों तक के हैं। काटजू रोड पर तीन बड़े होटल हैं, जो चारों तरफ से पूरी तरह बंद हैं। जानसेनगंज में खिलौना मार्केट के बगल में एक बड़े होटल और हीवेट रोड पर जानसेगंज चौराहे के पास कुंभ के पहले बने होटल की भी यही स्थिति है।

इससे कुछ दूरी पर हाल में ही बने बड़े होटल का भी यही हाल है। इन होटलों को आगे से शीशा लाकर इस कदर बंद कर दिया गया है कि शार्ट सर्किंट या किसी अन्य कारण से आग लगने पर धुआं बाहर नहीं निकल सकता। इन होटलों में कहने को तो आग से बचाव के इंतजाम हैं लेकिन चारों तरफ से पूरी तरह पैक होटलों में न फायर एलार्म हैं और न ही आग लगने के बाद धुआं निकलने का पर्याप्त स्थान है।
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छोटे होटलों की स्थिति और खराब है। लीडर रोड के साथ हीवेट रोड पर संकरी गली में चल रहे इन होटलों का प्रवेश द्वार भी बेहद संकरा है। कई होटलों में सीढ़ी चढ़ने के बाद संकरे और लंबे गलियारे से गुजरने के बाद कमरे हैं। इनके कमरे चारों तरफ से बंद और सीलन भरे हैं। दिखाने को तो इन होटलों में आग से बचाव के उपकरण रखे हैं लेकिन सब बेकार हैं।
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