याची के अधिवक्ता अशोक कुमार ओझा ने तर्क दिया कि याचियों को गलत रूप से फंसाया गया है। कथित घटना 12 जून 2020 की है। जबकि, एफआईआर सात अप्रैल 2021 को दर्ज कराया गया। एफआईआर तकरीबन 10 महीने बाद दर्ज किया गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुशीनगर जिले के सिरोही थाने के वीरेंद्र कुशवाहा व छह अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायिक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि मामले में अगली सुनवाई तक सीजीएम कोर्ट कोई कार्रवाई न करे। यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार ओझा ने दिया है।
विज्ञापन
याची के अधिवक्ता अशोक कुमार ओझा ने तर्क दिया कि याचियों को गलत रूप से फंसाया गया है। कथित घटना 12 जून 2020 की है। जबकि, एफआईआर सात अप्रैल 2021 को दर्ज कराया गया। एफआईआर तकरीबन 10 महीने बाद दर्ज किया गया है। घटना जिस समय हुई उस समय याची नंबर दो कुवैत में था। अधिवक्ता ने कहा कि यह मामला मनगढ़ंत और झूठा हैं।
हालांकि, सरकारी की ओर से इसका विरोध किया गया। कोर्ट ने पाया कि याचिका पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। कोर्ट ने विपक्षी पक्ष से चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है। याचियों को भी निर्देश दिया कि विपक्षी पक्ष की ओर से हलफनामा दाखिल होने के बाद प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करेंगे। कोर्ट ने सीजेएम कुशीनगर को भी निर्देशित किया कि वह मामले में अगली तिथि तक याचियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।