संगमनगरी की माटी ही कुछ ऐसी है कि हर किसी को अपना दीवाना बना लेती है। और यह संयोग ही है कि बाबा पृथ्वीराज कपूर और पिता राजकपूर ही नहीं त्रिवेणी को पूरा करते हुए फिल्म ‘दीवाना’ के नायक ऋषि कपूर का भी यहां आना हुआ। पिता राजकपूर और बाबा पृथ्वीराज कपूर से जुड़ी तमाम यादें तो यहां बिखरी हैं ही। ऋषि कपूर की फिल्म ‘कर्ज’ ने अजंता सिनेमा में जब सिल्वर जुबिली मनाई तो नीतू सिंह और टीना मुनीम के साथ ऋषि कपूर भी यहां आए थे। उस दिन के सभी शो दर्शकों के लिए नि:शुल्क रखे गए थे। हालांकि सुबह दस बजे से स्पेशल शो भी रखा गया था। लेकिन, ऋषि कपूर को आने में देर हो गई थी। वह मार्निंग शो शुरू होने के थोड़ी देर बाद पहुंचे लेकिन उनके पहुंचने पर फिल्म दोबारा शुरू कराई गई।
गीतकार यश मालवीय ने मुताबिक शो के दौरान ऋषि कपूर ने फिल्म के चर्चित गीत ‘ओम शांति ओम’ पर हाल के भीतर ही स्टेज पर डांस भी किया था। इसके लिए उन्होंने युवाओं को भी साथ बुला लिया था। इलाहाबाद प्रवास के दौरान ऋषि कपूर ने संगम पर जाकर अपने बाबा पृथ्वीराज कपूर के लिए तर्पण भी किया था। वह त्रिवेणी बांध स्थित लेटे हनुमान और सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन में दर्शन के लिए भी गए थे।
इसी तरह उनके पिता राजकपूर भी एक बार जब रंगमंच के सिलसिले में यहां आए तो क्लाइव रोड वाले बंगले में मधुशाला के रचनाकार हरिवंश राय बच्चन से भी मिलने गए। रात भर कविताओं का दौर चला। बच्चन सुनाते रहे और राजकपूर सुनते रहे। राजकपूर ने थिएटर पैलेस में नाटक किया भी और देखा भी था।
रंगनिर्देशक अनिल रंजन भौमिक कहते हैं, ऋषि कपूर युवा दिलों की धड़कन थे। एक बार कई दोस्तों के साथ कश्मीर जाने का मौका मिला तो हम सभी दोस्त भी गुलमर्ग सहित उन जगहों पर गए जहां पर बॉबी की शूटिंग हुई थी। हमने भी वैसे ही कपड़े पहनकर उन जगहों पर तस्वीरें खिंचवाईं। इलाहाबाद के लिए सुखद यह है कि निर्देशक रंजीत कपूर ने फिल्म ‘चिंटूजी’ बनाई तो उन्होंने कई अभिनेताओं के साथ इलाहाबाद के कलाकार अमिताभ श्रीवास्तव को अवसर दिया था।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा, फिल्म की शूटिंग के दौरान तीन-चार दिनों तक ऋषि कपूर के साथ रहने का मौका मिला। वह जितने अच्छे कलाकार थे, उतने ही व्यवहारकुशल भी। उनका व्यवहार बहुत ही सहज और दोस्ताना रहा। वह अक्सर शॉट के बाद साथ में बैठकर गप्पें लड़ाते थे। फिल्म ‘अमर अकबर एंथोनी’ में तो उनका नाम ही अकबर इलाहाबादी था।
महाप्राण निराला के प्रपौत्र विवेक निराला ने बताया कि जब पृथ्वीराज कपूर पहली बार निराला से मिलने गए तो निराला ने सुतली से पृथ्वीराज कपूर का सीना नापा और खुश होकर कहा, हां तुम्हारा सीना मेरे बराबर है। निराला रचनात्मक कदकाठी को शारीरिक कदकाठी के साथ ही मापते थे। उनके लिए यह भी एक कसौटी थी।