आवेेदक रमनदीप सिंह और 2 अन्य के अधिवक्ता पवन किशोर व राहुल अग्रवाल ने दलील दी कि सिविल मामले को आपराधिक रूप दिया गया है। जबकि यह धोखाधड़ी का मामला नहीं है। जमीन की बिक्री के दिन तक आवेदक का नाम खतौनी में दर्ज था। सीलिंग में जमीन सरकार में निहित हो गई। इसके खिलाफ वाद लंबित है। वहीं, बीडीए के अधिवक्ता ने दलील दी कि सीलिंग अधिनियम के तहत अधिसूचना जारी होने के बाद चिह्नित भूमि पूरी तरह से राज्य सरकार में निहित हो जाती है। उसके बाद का कोई भी लेन-देन शुरू से ही अमान्य है। अन्य दलीलें दीं।
न्यायालय ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि सिविल मामलों में आपराधिक मुकदमा चलाना गंभीर मामला है। इससे किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित होती है। साथ ही व्यक्ति की प्रतिष्ठा को बड़ा नुकसान पहुंचता है। ऐसे मुकदमे को जारी रखना कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग और मानसिक आघात है। न्यायालय ने दर्ज मुकदमे की संपूर्ण कार्रवाई को रद्द कर दिया।