कान्वेंट एवं पब्लिक स्कूलों में हर वर्ष फीस तो बढ़ रही है, लेकिन सुविधाएं नहीं। स्कूलों में बच्चों के लिए सीबीएसई एवं संबंधित बोर्ड की ओर से समय-समय पर गाइडलाइन जारी की जाती है। लेकिन, इन्हें लागू कराने के नाम पर स्कूल पड़ला झाड़ लेते हैं। मसलन, सीबीएसई ने छोटे बच्चों को स्कूल के ही सीनियर्स की दबंगई से बचाने के लिए एंटी बुलिंग स्कीम शुरू की गई थी, इसे दो सत्र बीतने के बाद भी लागू नहीं किया गया। अमर उजाला की ओर से अभिभावकों की राय जानी गई तो कई विसंगतियां सामने आईं। कहा कि फीस बढ़ाने से पहले स्कूल वाले अभिभावक-शिक्षक समिति अथवा शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी कोई राय नहीं लेते हैं।
0 निजी स्कूलों के पास अपनी ट्रांसपोर्ट व्यवस्था नहीं है। स्कूलवाले निजी वाहन चालकों को कैंपस के अंदर से बच्चों को बैठाने की सुविधा देते हैं और उनसे रकम वसूलते हैं। हालांकि, जब प्रशासन स्कूली वाहनों के लिए खिलाफ अभियान चलाता है, तब स्कूल प्रबंधन हाथ खड़े कर देता है। स्कूल प्रबंधन के इस रवैये का परिणाम बच्चों और अभिभावकों को भुगतना पड़ता है।
डॉ. पंकज मिश्र, अभिभावक।
0 स्कूल प्रबंधन सीबीएसई एवं सीआईएससीई की गाइड लाइन के अनुसार विद्यालय में काबिल काउंसलर की नियुक्ति नहीं कर सका है। बोर्ड को बच्चों के पाठ्यक्रम एवं होमवर्क के दबाव से निजात दिलाने के लिए काउंसलर मार्गदर्शन कर सकता है। बच्चों के खान-पान के बारे में स्कूल वाले कोई जानकारी नहीं देते। बच्चों को सरकार की ओर से मिलने वाली स्कॉलरशिप के बारे में जानकारी भी नहीं जाती है।
प्रकाश त्रिपाठी, अभिभावक
0 शहर में सबसे अधिक फीस लेने वाले तथा सबसे अच्छे विद्यालय का दावा करने वाले स्कूलों में अचानक बीमार पड़ने पर बच्चों के लिए चिकित्सा सुविधा नहीं है। स्कूल वाले अभिभावकों को फोन करके अपने कर्तव्य पूरा कर लेते हैं। स्कूल गंभीर बीमार पड़ने पर बच्चों के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। आखिर में स्कूल वाले मोटी फीस लेने तथा हर वर्ष फीस बढ़ाने के बाद बच्चों-अभिभावकों के प्रति जवाबदेह क्यों नहीं हैं?
दुर्गेश दुबे, अधिवक्ता
0 स्कूल की सूचनाएं बताने के लिए स्कूल प्रबंधन की ओर से अभिभावकों के मोबाइल पर मैसेज किया जाता है। इसकी वसूली फीस से ही की जाती है। कुछ स्कूलों में इस सेवा के लिए प्रति बच्चे से 500 रुपये लिए जाते हैं। वहीं विभिन्न दूर संचार कंपनियां कई मैसेज एक साथ भेजने के लिए सस्ती सुविधाएं उपलब्ध करवा रही हैं। एक विद्यालय में पांच हजार बच्चों से मैसेज के नाम पर साल भर में पांच सौ वसूल करने पर 25 लाख वसूल रहे हैं, जबकि बल्क में कुछ हजार में ही अभिभावकों को मैसेज भेज रहे हैं।
दिव्या शुक्ला, अभिभावक
निजी प्रबंधन की ओर से मनमाने तरीके से फीस वृद्धि कर दी गई है। स्कूलों में नियम विरुद्ध किताबें लागू की जा रही हैं। सरकार के निर्देश के बाद भी निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के साथ खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। प्रशासन की मदद से इस मामले की जांच करके स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मो. इब्राहिम, उप शिक्षा निदेशक
प्रयागराज मंडल