पहली दिसंबर से राष्ट्रीय राजमार्गों के हर टोल प्लाजा पर फास्टैग डिवाइस से इलेक्ट्रानिक टोल कलेक्शन(ईटीसी) आरंभ होने पर पैसा, परिश्रम और वक्त तीनों की बचत होगी।
राजपथों पर ध्वनि, वायु प्रदूषण भी कम होगा। फास्टैग डिवाइस लगने के बाद एनएच-2 यानी कोखराज-हंडिया-लालानगर रूट पर छह टोल प्लाजा से प्रतिदिन गुजरने वाले 5677 से अधिक वाहनों के औसतन 390 घंटे बच सकेंगे। इसी तरह 25-30 हजार रुपये के हर रोज ईंधन की भी बचत हो सकेगी।
फास्टैग से टोल कलेक्शन की नई व्यवस्था पहली दिसंबर से ललागू करने के लिए एनएचएआई ने एडी-चोटी का जोर लगा दिया है। फिलहाल टोल विंडो पर फास्टैग की उपलब्धता में भारी कमी होने की वजह से अभी तक 35 फीसदी ही वाहनों में यह सुविधा दी जा सकी है। ऐसे में तय अवधि तक इलेक्ट्रानिक टोल कलेक्शन पूर्णतया लागू हो पाएगा, अभी कहना जल्दबाजी होगी।
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने एक दिसंबर से टोल प्लाजा पर टैक्स वसूलने के लिए ईटीसी स्मार्ट प्रणाली लागू करने का फैसला किया है। इस टोल कलेक्शन सिस्टम के फायदे ही फायदे गिनाए जा रहे हैं। आकलन के मुताबिक जाम या कोई अन्य वजह सन होने पर सामान्य यातायात के दौरान एक प्लाजा पर टोल टैक्स पर्ची कटवाने में कम से कम पांच मिनट का समय वाहन चालक को लगता है।
एनएचएआई के आंकड़े के मुताबिक एनएच-2 पर प्रतिदिन 46 से 48 हजार वाहनों से टोल टैक्स वसूला जाता है। इन वाहनों में पासटैग डिवाइस लगने पर बिना रुकेयात्रा में कुल 390 घंटे बच सकेंगे। फिलहाल एनएच-2 को छह टोल बरियरों पर बैरियर पर रीडर लगा दिए गए हैं। इसके अलावा फास्टैग विंडो भी खोल दी गई है।
लेकिन, इस लंबी कवायद के बाद भी एक दिसंबर से नई व्यवस्था लागू हो पाएगी, यह कहना मुश्किल होगा। इसलिए कि फास्टैग मिल ही नहीं रहे हैं। ज्यादातर टोल प्लाजा की लेन में अभी इटीसी भी नहीं लगाया जा सका है। इटीसी की भी कमी है। इसके लिए एनएचएआई के परियोजना निदेशक एके राय ने मंगलवार को मुख्यालय के अफसरों से बात की, लेकिन समाधान नहीं निकल सका।
एक लेन कैश टोल कलेक्शन के लिए छोड़ने की तैयारी
प्रयागराज। टोल बैरियरों पर फास्टैग की कमी बरकरार है। एनएचएआई के अफसर भी मानने लगे हैं कि एक दिसंबर से पूर्ण रूप से हर टोल प्लाजा पर ईटीसी लागू नहीं हो सकेगी। ऐसे में एक लेन कैश टोल कलेक्शन के लिए छोड़ी जाएगी, ताकि लोगों को असुविधा का सामना न करना पड़े।
फास्टैग डिवाइस से जुड़ने के बाद वाहनों के समय के साथ ही ईंधन की भी भारी बचत होगी। फिलहाल फास्टैग की कमी बनी हुई है। इसे दूर कराने की कोशिश की जा रही है, ताकि नई व्यवस्था समय से सुचारू रूप से लागू हो सके। एके राय, परियोजना निदेशक, एनएचएआई।