सोरांव तहसील क्षेत्र के जूड़ापुर दांदू गांव से सोनभद्र के बीच प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे के सर्वे को लेकर किसानों में आक्रोश है। किसानों ने अपनी भूमि को सरकारी बताए जाने और जमीन की वर्तमान मालियत से कम मालियत तय करने का आरोप लगाया है।
रविवार को चक झाखरराय के निकट एक बगीचे में कई गांवों के किसानों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। इनमें उसरही, मरियमपुर, चांदपुर मटियारा, सराय बहार, गोहरी, वजीराबाद और चक झाखरराय के किसान शामिल थे। किसानों का कहना है कि वर्ष 1952 से उनकी जमीन पर नाम दर्ज था।
किसानों के अनुसार, विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए सर्वे के बाद समाचार पत्र में गजट हुआ तो उनकी जमीन को सरकारी जमीन का हवाला दिया गया। साथ ही, खतौनी से किसानों का नाम ही गायब कर दिया गया। इससे प्रभावित किसान मानसिक रूप से परेशान हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब वर्ष 1952 से उनका नाम दर्ज था, तो अब इसे हवाई अड्डा की जमीन क्यों दिखाया जा रहा है। किसानों ने अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन के बदले बाजारू मूल्य का पांच गुना मुआवजे की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि वे अपनी जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे। इस मौके पर डॉ. इंद्रजीत पटेल, अभय सिंह पटेल, अर्जुन पटेल, शारदा प्रसाद पटेल, भोला पटेल, राम सिंह, चंद्रप्रकाश और सुधीर राय आदि रहे।