मौसम की मार झेल रहे प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है यदि सरकार पहले से लागू अनिवार्य बीमा योजना का सही तरीके से पालन करती है। राष्ट्रीय किसान यूनियन ने यह मामला हाईकोर्ट में उठाया है। जनहित याचिका दाखिल कर कहा गया है कि किसान क्रेडिट कार्ड पर कृषि ऋण लेने वाले किसान स्वत: और अनिवार्य रूप से बीमित हो जाते हैं। इस योजना का पालन होने से किसानों को नुकसान होने पर बीमा की राशि मिलनी चाहिए। याचिका में राज्य सरकार द्वारा दी जा रही आर्थिक मदद की कोर्ट से निगरानी करने की मांग की गई है। जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और राज्य सरकार से पूछा है कि क्या कर्ज लेने पर किसान अनिवार्य रूप से बीमित होंगे। प्रदेश में अब तक हुई किसानों की मौतों और उनको दी गई राहत की भी जानकारी मांगी है।
राष्ट्रीय किसान यूनियन का पक्ष रख रहे बीएम सिंह का कहना था कि सूबे में अब तक 1153 किसानों की फसल बर्बाद होने के कारण या तो मौत हुई है या उन्होंने आत्महत्या कर ली है। उत्तर प्रदेश के एक करोड़ 60 लाख किसान की करीब सवा दो करोड़ एकड़ फसल बर्बाद हुई है। जिन किसानों ने बैंकों से कर्ज लिया था वह उसे वापस नहीं कर सकते इस स्थिति में अगले वर्ष के लिए उनको कर्ज नहीं मिलेगा। सरकार या तो कर्ज माफ कर दे या आगामी वर्षोें के लिए टर्म लोन में परिवर्तित कर दे। वीएम सिंह ने एक और अहम योजना की ओर कोर्ट का ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का सकुर्लर है कि किसान क्रे डिट कार्ड पर कर्ज लेने वाले किसानों का स्वत: और अनिवार्य रूप से बीमा हो जाता है। बैंक यदि प्रीमियम की राशि नहीं काटते हैं तब भी वह बीमा देने केलिए बाध्य हैं। यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया जाए तो कर्ज लेने वाले एक लाख 60 हजार किसानों को अलग से राहत देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
याची की दलील थी कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच किसानों को राहत देने के नाम पर खींचतान है। राज्य सरकार का दावा है कि 1455.57 लाख रुपये की राहत राशि जारी कर दी गई है। मगर किसानों को 60 और 65 रुपये के चेक राहत के नाम पर मिल रहे हैं। वजह यह है कि लेखपाल जिनको कोई तकनीकी जानकारी नहीं है, वह मुआवजे की राशि तय कर रहे हैं। मांग की गई अदालत राहत राशि के वितरण की स्वयं मॉनिटरिंग करे।
खंडपीठ ने केंद्र सरकार से पूछा है कि कितने किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ऋण लिया है। आरबीआई से पूछा है कि क्या ऋण लेने वाले किसान का अनिवार्य बीमा होता है तथा प्रदेश सरकार से अब तक किए गए राहत कार्यों, फसलों को हुए नुकसान आदि की जानकारी मांगी है। याचिका पर 27 मई को अगली सुनवाई होगी।