जसरा बाईपास में अधिग्रहित भूमि का बना कम मुआवजे को लेकर काम रोकने के बाद किसानों का प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी से उनके कार्यालय पर मिलने गया। प्रतिनिधि मंडल में शामिल किसान रामबाबू कुशवाहा अपने को रोक न सका जिलाधिकारी के समक्ष रोते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा " मेरे पास यही भूमि है ,इसी से मैं अपने परिवार का भरण पोषण करता हूं। मेरे जमीन की कीमत तय मुआवजा से बहुत ज्यादा है। साहब न्याय कीजिए नहीं मैं अपनी जान दे दूंगा, आप सड़क बनवा लीजिएगा। "
जसरा बाईपास के निर्माण के काम को किसानों ने 29 दिसंबर को पचखरा गांव में रोकवा दिया। मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार से किसान नेता केके मिश्रा व किसानों से बहस के बाद जिलाधिकारी ने किसानों के साथ बातचीत करने का समय दिया था। किसानों के प्रतिनिधि मंडल के नेता केके मिश्रा ने जिलाधिकारी से मुआवजा बढ़ा कर देने के बाद ही काम लगाने का अनुरोध किया।
किसानों का कहना है कि 2015 में रीवा बाईपास के निर्माण में अधिग्रहित की गई गौहनियां और अमरेहा ग्राम सभा के किसानों की भूमि का मुआवजा 80 लाख रुपये बीघा मुआवजा दिया गया था। आठ वर्ष बाद 32 लाख बीघा बनाया गया है, जबकि जमीन की कीमत काफी अधिक हो गई है। किसान गुरु चरन साहू ने बताया कि रीवा बाईपास में मेरी भूमि संख्या 146 का हिस्सा अधिग्रहण किया गया था और 80 लाख बीघा मुआवजा मिला था। उसी भूमि का शेष भाग जसरा बायपास में अधिग्रहित किया गया है। उसका मुआवजा 32 लाख बीघा बनाया गया है, जबकि मेरी जमीन की कीमत बहुत अधिक है। इसी तरह पांडर, पचखरा , खटंगिया व जसरा की भूमि भी कीमती है।