बैठक में बताया गया कि अनुचित साधनों का प्रयोग करना, नकल करना या कराना, प्रश्नपत्र का प्रतिरूपण करना या उसका अनाधिकृत रूप से खुलासा करना या इस कार्य में षड्यंत्र करना अपराध की श्रेणी में आता है, जो उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत दंडनीय है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर अधिकतम एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना व आजीवन कारावास या दोनों ही सजा हो सकती है। आयोग के लिए इस परीक्षा का सफल आयोजन बड़ी चुनौती होगी। अपने गठन के बाद आयोग पहली पर कोई परीक्षा कराने जा रहा है। बैठक का संचालन आयोग उपसचिव डॉ. शिवजी मालवीय ने किया। इस मौके पर आयोग के सभी सदस्य, अफसर व कर्मचारी मौजूद रहे।
आयोग ने जारी किए अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र रविवार को जारी कर दिए, जो आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। अशासकीय महाविद्यालयों में 33 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा 16 व 17 अप्रैल को दो पालियों में सुबह 9:30 से 11:30 बजे और अपराह्न 2:30 से 4:30 बजे तक प्रयागराज समेत आगरा, मेरठ, लखनऊ, गोरखपुर और वाराणसी के विभिन्न केंद्रों पर होगी। परीक्षा के लिए तकरीबन 85 हजार परीक्षार्थी पंजीकृत हैं।
डॉ. विकास सिंह बने आयोग के उपसचिव
राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर में प्रवक्ता डॉ. विकास सिंह को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का उप सचिव नियुक्त किया गया है। आयोग में उप सचिव के चार पद हैं। डॉ. विकास सिंह की नियुक्ति से पहले केवल एक उप सचिव डॉ. शिवजी मालवीय की तैनाती थी। अब दो उप सचिव हाे जाएंगे लेकिन दो पद अब भी रिक्त हैं। डॉ. विकास को तीन साल के लिए इस पद पर तैनात किया गया है।