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कुंभ में हुए घोटालों की भेंट चढ़े पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता

Fri, 09 Oct 2020 07:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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पीपे का पुल।
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कुंभ 2018-19 में पंाटून पुलों के प्रयोग में होने वाली सामग्रियों, चकर्ड प्लेट मार्गों के निर्माण में की गई घपलेबाजी का इनाम आखिरकार पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर को मिल गया। शासन ने कुंभ 2018-19 के प्रभारी व पीडब्ल्यूडी खंड चार के अधिशासी अभियंता विपिन पचौरियां को जबरन सेवानिवृति दे दी। इस संबंध में शासन की ओर से पत्र भी जारी कर दिया गया है। शासन की इस कार्रवाई से पीडब्ल्यूडी में हड़कंप है। कई और अभियंताओं पर इसकी तलवार लटक रही है। उसकी सूची भी शासन ने बनाई है। जल्दी ही उसे भी जारी की जाएगी। 
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शासन की ओर से प्रदेश के पांच अधिशासी अभियंताओं को जबरन सेवानिवृत्ति दी गई है। इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ हो रही कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। अधिशासी अभियंता विपिन पचौरिया यहां पीडब्ल्यूडी खंच चार के प्रभारी थे। उनके अगुवाई में ही कुंभ मेला 2018-19 के सारे काम कराए गए लेकिन उनके द्वारा कराए गए हर कामों पर सवालियां निशान खड़े हुए।

कुंभ में करीब चार हजार किमी चकर्ड प्लेटों मार्गों के निर्माण से लेकर पांटून पुलों में प्रयोग की जानी वाले सामग्रियों की खरीददारी में जमकर घपलेबाजी की। यहां तक की नट बोल्ट भी बहुत ही घटिया स्तर के खरीदे गए। जबकि, पांटून पुलों के निर्माण में लगने वाले साल के स्लीपर भी पंजाब व दूसरे प्रदेशों से बहुत ही घटियां और मानक के विपरीत मंगाए गए। अेकले स्लीपर की खरीददारी में करोड़ों का वारा-न्यारा किया गया। स्लीपर सहित कई सामान की खरीददारी के मामले में फिलहाल जांच चल रही है।
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 इसके अलावा चकर्ड प्लेट मार्गों का कार्य भी मानक के अनुरूप नहीं किया गया। सड़कों के लिए 12 सौ करोड़ रूपये का बजट आवंटित किया गया था। लेकिन, अभियंता ने कई सड़कों का निर्माण कराए बिना ही फर्जी तरीके से भुगतान भी कर दिया। बहुत से सामानों की खरीददारी बिना टेंडर के की गई। इन सभी मामलों को लेकर शासन स्तर पर लगातार शिकायतें भी की गईं हैं। इसके बाद ही उनका यहां से एटा स्थानांतरण कर दिया गया था।

पिछले महीने शासन ने मुख्य अभियंता को पत्र भेजकर उनके कार्यकाल के दौरान हुए घोटालों की जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्य अभियंता ने अधीक्षण अभियंता को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। अभी मामले में कोई रिपोर्ट नहीं आई है। लेकिन, इस कार्रवाई से विभाग में खलबली है। कहा जा रहा है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अभियंताओं की सूची तैयार कर ली गई है। जल्दी ही और लोगों को जबरन सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी।
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