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कोविड अस्पताल में नहीं बैठ रहे अधिशासी अभियंता

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कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने से बच रहे हैं। लोक निर्माण विभाग के एक अधिशासी अभियंता की ड्यूटी कोटवा-बनी स्थित कोविड-19 के लेवल-1 हॉस्पिटल पर लगाई गई है, लेकिन वे ड्यूटी से नदारद हैं। जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
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लॉकडाउन होने के बाद से ही सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को मुख्यालय न छोड़ने तथा जिला प्रशासन के सदैव संपर्क में बने रहने को कहा गया है। परंतु विभागीय सूत्र बताते हैं कि लोक निर्माण विभाग के विद्युत एवं यांत्रिक खंड के अधिशासी अभियंता देवेंद्र निगम अपने गृह जनपद आगरा चले गए। जिला प्रशासन की ओर से उनके अधीन काम कर रहे अवर अभियंताओं और जूनियर अभियंताओं की कोरोना में ड्यूटी लगाने की सूची मांगी गई तो उनमें से अपने चहेते अभियंताओं का नाम हटाकर 17 की बजाय 11 अवर एवं जूनियर अभियंताओं की सूची भेजी, जिसको लेकर विभाग में रोष व्याप्त हो गया।
जिला प्रशासन की ओर से एक्सईएन को कोटवां-बनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्थापित लेवल-1 हॉस्पिटल और बेली अस्पताल में विद्युतीकरण के साथ सीसीटीवी लगवाना व विद्युत आपूर्ति करवाने सहित कई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस बारे में अधिशासी अभियंता देवेंद्र निगम से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल नंबर स्विच ऑफ बताता रहा, जबकि अधीक्षण अभियंता का फोन नहीं उठा। एक्सईएन के कार्यालय में न होने का प्रकरण जब डीएम भानुचंद्र गोस्वामी तक पहुंचा तो उन्होंने मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने को कहा है।
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कोरोना पाजिटिव हैं, लेकिन नहीं दिख रहे लक्षण
एक-दो में जुकाम, बुखार की शिकायत, शुरू में हुई सांस लेने की तकलीफ लेकिन अब सामान्य
कोरोना होने पर यह जरूरी नहीं है कि हर सांस मरीज पर भारी पड़े। ये कहना है कोरोना का उपचार कर रहे डॉक्टरों का। वे कहते हैं कि कोरोना के कई मरीज ऐसे हैं जो सामान्य हैं। उनमें कोरोना की जांच रिपोर्ट तो पॉजिटिव आई है, लेकिन बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं।
जिले में कोरोना के संक्रमण की पुष्टि एक ही व्यक्ति में हुई है। वह भी इंडोनेशियाई नागरिक है, जबकि आठ मरीज दो जनपदों के भर्ती हैं। छह मरीज प्रतापगढ़ जिले के हैं, जबकि दो कौशाम्बी के हैं। सभी नौ मरीजों को कोटवां-बनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। कोरोना संक्रमितों का उपचार कर रहे डॉ. रमेश चंद्र यादव ने बताया कि अस्पताल में भर्ती सभी नौ मरीजों में केवल दो मरीजाें को शुरुआत में जुकाम-बुखार और खांसी की शिकायत थी। बाकी सात में बीमारी के सामान्य लक्षण भी नहीं नजर आ रहे हैं। वे बिल्कुल ही सामान्य अवस्था में थे और हैं भी। कोई लक्षण न होने से उन्हें कोई विशेष उपचार दिए जाने की जरूरत भी नहीं महसूस हुई है।
एंटीबायोटिक दवाओं से मिल रहा आराम
कोरोना पाजिटिव मरीजों को एंटीबॉयोटिक दवा एजिथ्रोमाइसिन, एलर्जिक दवा सिट्रेजीन और बुखार के लिए सामान्य तौर पर पैरासिटामाल जैसी दवाएं दी गईं, जिससे उनको आराम मिला। डॉ. रमेश चंद्र के मुताबिक सभी मरीजों को डब्ल्यूएचओे और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक ही दवाएं दी गईं, जिससे इनकी हालत में सुधार है। कोरोना के लेवल-वन हॉस्पिटल के नोडल आफिसर डॉ. वीके मिश्रा ने बताया कि आइसोलेशन से मरीजों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई। उसका असर यह हुआ कि सप्ताह भर में मरीजों की हालत सामान्य हो गई है।
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